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मोदी ने लिया बड़ा जोखिम, कहा- योजना फेल हुई तो पूरी जिम्मेदारी मेरी 

Sat, 10 Dec 2016 02:54 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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नरेंद्र मोदी
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पीएम मोदी ने कालेधन पर चोट करने के लिए नोटबंदी की योजना बेहद गोपनीय तरीके से तैयार कराई थी। पीएम ने इस अभियान में अपने विश्वस्त नौकरशाह और रेवेन्यू सेक्रेट्री हंसमुख अढिया को साथ लिया और देश के 86 फीसदी को बैंकिंग सिस्टम में समेट लाने का जोखिम भरा कदम उठाया।
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अढिया के अलावा पांच और लोगों को इस योजना का राजदार बनाया गया और उन्हें गोपनीयता की कसमें खिलाई गईं। लेकिन पीएम ने जिम्मेदारी खुद पर ली। 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले से ठीक पहले पीएम ने मीटिंग में कहा- मैंने सारा रिसर्च कर लिया है औैर अगर मैं अपने इस अभियान में नाकाम रहता हूं तो सारी जिम्मेदारी मेरी होगी।

नोटबंदी का मकसद अर्थव्यवस्था से कालेधन की सफाई करना है और इसके लिए प्रधानमंत्री ने अपनी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता को दांव पर लगाते हुए यह कदम उठाया। उन्हें युवा रिसर्चरों की टीम की मदद मिल रही थी, जो प्रधानमंत्री मोदी के नई दिल्ली स्थित आवास के दो कमरों में लगातार काम कर रही थी। पीएम मोदी के वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से यह आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम था। 
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हालात सुधरने में लगेगा अभी समय

नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर की रात को 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित कर हर किसी को चौंका दिया। पीएम द्वारा नोटबंदी की योजना को गोपनीय रखने का मकसद यह था कि इसकी जानकारी कालाधन रखने वाले लोगों को न मिल जाए।

ऐसा होने पर वे मौके का फायदा उठा सकते थे और अपने छिपे हुए अवैध कालेधन को सोना, जमीन या अन्य संपत्तियों में लगा सकते थे। सूत्रों के अनुसार नोटबंदी में रिस्क होने के बावजूद पीएम इसे लागू करने को तत्पर थे। नोटबंदी पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग थीं। कुछ लोगों का मानना था कि नोटबंदी से बैंकों में अधिक पैसे आएंगे और सरकार के कर में वृद्धि होगी।

दूसरी ओर, बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतार में घंटों खड़े होने को मजबूर लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं। नोटबंदी का असर मजदूरों पर भी पड़ा है। उन्हें पैसे नहीं मिल पा रहे हैं और हालात जल्दी सामान्य होते भी नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि योजना को लेकर पहले से पर्याप्त मात्रा में करेंसी नहीं छपे होने के चलते स्थिति अभी सामान्य होने में महीनों लग जाएंगे।
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