पीएम मोदी ने कालेधन पर चोट करने के लिए नोटबंदी की योजना बेहद गोपनीय तरीके से तैयार कराई थी। पीएम ने इस अभियान में अपने विश्वस्त नौकरशाह और रेवेन्यू सेक्रेट्री हंसमुख अढिया को साथ लिया और देश के 86 फीसदी को बैंकिंग सिस्टम में समेट लाने का जोखिम भरा कदम उठाया।
अढिया के अलावा पांच और लोगों को इस योजना का राजदार बनाया गया और उन्हें गोपनीयता की कसमें खिलाई गईं। लेकिन पीएम ने जिम्मेदारी खुद पर ली। 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले से ठीक पहले पीएम ने मीटिंग में कहा- मैंने सारा रिसर्च कर लिया है औैर अगर मैं अपने इस अभियान में नाकाम रहता हूं तो सारी जिम्मेदारी मेरी होगी।
नोटबंदी का मकसद अर्थव्यवस्था से कालेधन की सफाई करना है और इसके लिए प्रधानमंत्री ने अपनी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता को दांव पर लगाते हुए यह कदम उठाया। उन्हें युवा रिसर्चरों की टीम की मदद मिल रही थी, जो प्रधानमंत्री मोदी के नई दिल्ली स्थित आवास के दो कमरों में लगातार काम कर रही थी। पीएम मोदी के वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से यह आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम था।