आम बजट में पूरी तरह पीएम मोदी सेच उभरकर सामने आई है। पांच राज्यों के चुनाव और नोटबंदी की मार के बाद से उम्मीद जताई जा रही थी कि किसानों को राहत और कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ऋणमाफी सरीखे लोकप्रिय कदम उठा सकती है। भाजपा के पैतृक संगठन संघ के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी सरकार से कहा गया था कि छोटा ही सही मगर किसानों के लिए बजट में कुछ राहत जरूर होनी चाहिए। यहां तक की कांग्रेस ने भी सरकार से किसानों का ऋण माफ करने की मांग की थी।
मगर संसद में पेश आम बजट में इस तरह का कुछ नहीं दिखा। बताया जा रहा है कि बजट में पीएम मोदी की सोच स्पष्ट झलकी है। मोदी सदैव से ही लोकप्रियता बटोरने के बजाय मजबूत आधार प्रदान करने वाले कामों में विश्वास करते हैं।
यही वजह है कि कृषि प्रधान यूपी और पंजाब सरीखे राज्यों के चुनाव सिर पर होने के बावजूद भी सरकार ने किसानों के ऋण माफी अथवा ऋण ब्याज घटाने सरीखा लोकप्रिय कदम बजट में नहीं उठाया है। हालांकि जेटली ने कहा है कि कृषि और किसानों के कल्याण के लिए 35,984 करोड़ रूपए का बजट में प्रावधान है।
अन्य क्षेत्रों की तरह ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में भी सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। खेती में वैज्ञानिक तौर तरिकों के इस्तेमाल पर जोर है। तो सुखाड़ खत्म करने के लिए सिंचाई योजनाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए त्वरित कार्ययोजना पर अमल किया है। देश में अभी कुल 141 मिलियन हेक्टेयर खेती योग्य भूमि के 46 प्रतिशत तक ही सिंचाई सुविधा है।
2018 तक सभी गांवों में पहुंच जाएगी बिजली
सांकेतिक चित्र
सरकार ने पीएम कृषि सिंचाई योजना के जरिए 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का एलान किया है। जेटली ने बताया कि लंबित पड़ी 89 सिंचाई परियोजनाओं के काम चाल हो गए हैं, इनमें से 23 परियोजनाएं मार्च 2017 तक पूरी भी हो जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इन पिरयोजनाओं के लिए अगले वर्ष 17000 करोड़ रूपए लगेंगे। जबकि अगले 5 वर्षों में इसमें 86,500 करोड खर्च होंगे। इसके अलावा भूजल में सुधार के लिए सरकार ने अलग से 6000 करोड़ का प्रावधान किया है। तो खेत की सेहत सुधारने के लिए वित्त मंत्री ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में भी रकम की बढ़ोत्तरी की है।
वहीं परंपरागत खेती के विस्तार का लक्ष्य दर्शाते हुए जेटली ने कहा कि देश में परंपरागत खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। अगले तीन सालों में 5 लाख हेक्टेयर भूमि पर आर्गेनिक खेती के अलावा सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में आर्गेनिक वेल्यू चेन का विस्तार किया जाएगा। तो 850 करोड़ की लागत से पशूधन संजीवनी कार्यक्रम शुरू किया गया है। इससे पशूओं का कल्याण होगा।
ग्रामीण इलाकों में मिलने वाली सरकारी मदद को पिछले वर्ष की तूलना में 228 प्रतिशत का उछाल बताते हुए जेटली ने कहा कि 80 लाख रूपए प्रति ग्राम पंचायत और 21 करोड़ स्थानिय निकायों को मिलेगी। पंचायती राज्य मंत्रालय राज्यों के सहयोग के साथ इसपर कार्य करेगा। गावों से सूखे और भूखमरी की समस्या से निजात दिलाने के लिए दिनदयाल अंतयोदय मिशन की शुरूआत की है। इसके जरिए स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
2018 तक सभी गांवों में पहुंच जाएगी बिजली
जेटली ने कहा है कि मई 2018 तक देश के सभी गावों में बिजली पहुंच जाएगी। अप्रैल 2015 तक देश में 18,542 गांव ऐसे थे जोकि विधुत से महरूम थे। दिनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत सरकार ने वर्ष 2018 तक सभी गांवों को बिजली व्यवस्था से लैस करने का एलान किया है। तो खेती में वैज्ञानिक तकनीक को बढ़ावा देने के कवायद में सरकार ने देश के सभी674 कृषि विज्ञान केंद्रो में मिनी लैब बनाने का एलान किया है।
कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रतिशपर्धा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित करने का एलान किया है। इसमें अव्वल आने वाले केंद्र को बतौर इनाम 50 लाख रूपए प्रदान किए जाएंगे। भूमि अभिलेखों को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने बजट में 150 करोड़ का प्रावधान किया है।