प्रदर्शन से भाजपा उत्साहित
भारतीय जनता पार्टी ने मेघालय नागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में जो प्रदर्शन किया है उससे भारतीय जनता पार्टी के नेता न सिर्फ उत्साहित है बल्कि एक बड़ी रणनीति की ओर बढ़ने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि नॉर्थ ईस्ट में भारतीय जनता पार्टी के लिए एक वक्त में सीटें जीतना और अपना प्रभाव बनाना बहुत संघर्ष करने जैसा था। शुक्ला कहते हैं कि जब 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी से जब बंपर सीटें मिली तो कहा जाने लगा कि 2019 में इन सीटों में गिरावट होगी और उसको कहीं ना कहीं कवर करना होगा। लंबे समय तक नॉर्थ ईस्ट में काम करने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पार्टी लगातार नॉर्थ ईस्ट में काम तो कर ही रही थी लेकिन इसको भी चैलेंज के तौर पर लेते हुए नार्थ ईस्ट में अपनी पूरी ताकत लगाई। पार्टी के बड़े-बड़े रणनीतिकारों ने नॉर्थ ईस्ट में जाकर न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को और मजबूत करने के लिए ग्राउंड लेवल पर काम किया बल्कि बूथ स्तर पर काम करके सियासी ताकत का एहसास भी कराया।
2024 के चुनाव के परिणाम का संकेत
भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि 2018 के विधानसभा चुनावों में नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में जो नतीजे आए वह सबके सामने थे। उनके सामने इन राज्यों में 2023 के विधानसभा चुनावों में अपने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद में मेहनत करनी थी। इस दौरान 2019 का लोकसभा चुनाव भी होना था। पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अब जो नतीजे 2023 में नॉर्थ ईस्ट में आए हैं वह बताते हैं कि 2024 के चुनावों का परिणाम क्या होने वाला है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नार्थ ईस्ट में भारतीय जनता पार्टी के लिए विधानसभा के चुनावों के साथ-साथ लोकसभा के चुनाव और उनके परिणाम भी लगातार बेहतर होते जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि अगर गुरुवार को आए नतीजों को 2024 के लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखें तो भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्साहजनक तस्वीर नजर आ रही है। शुक्ला कहते हैं नार्थ ईस्ट में आए परिणामों में कांग्रेस का जो हश्र हुआ है वह उनकी कमजोर रणनीति और नीतियों की ओर इशारा कर रहा है।
लगाए जा रहे ये कयास
वो कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को लेकर कयास यही लगाया जा रहा है कि जिन राज्यों में सबसे ज्यादा सीटें भाजपा के खाते में है हैं वहां पर सीटें 2024 में कम हो सकती है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को नॉर्थईस्ट से लेकर दक्षिण के राज्यों पर अपना फोकस करने की जरूरत है। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने इस पॉइंट पर मजबूत पकड़ बना ली है। उनका अनुमान है कि नॉर्थ ईस्ट में जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी मजबूत हो रही है। दक्षिण भारत में भी भारतीय जनता पार्टी अपनी सियासी गोटियां सेट कर रही है, उससे अनुमान तो यही लगाया जा रहा है कि गुजरात जैसे चुनावी परिणाम अलग-अलग राज्यों और लोकसभा के चुनावों में भी हो सकते हैं। इसके पीछे तर्क देते हुए जटाशंकर सिंह कहते हैं कि जिन राज्यों में लंबे समय तक खासतौर से गुजरात में लंबे समय तक सरकार होने के बाद भी एंटी इनकंबेंसी का असर नहीं दिखा। तो नए राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के लिए यह खतरा तो बिल्कुल नहीं है। ऐसे में जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के पास अभी लोकसभा में भी सीटें कम है और विधानसभा में भी सीटें कम है वहां पर स्कोप सबसे ज्यादा है।
मनोज तिवारी ने कही ये बात
नॉर्थ ईस्ट के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक और दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी कहते हैं नार्थ ईस्ट में जब चुनाव प्रचार करने गए तभी पता चल गया था यहां पर भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने वाला है। वह कहते हैं कि आने वाले दिनों में नॉर्थईस्ट नहीं बल्कि देश के सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ऐसे ही प्रचंड बहुमत के साथ न सिर्फ अपनी सरकार बनाएगी बल्कि लोगों का भरोसा जीतती रहेगी। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के इस मजबूत विश्वास के पीछे को राजनीतिक विश्लेषक नरेंद्र मोदी की ताकत बताते हैं। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जिस तरीके से नॉर्थ ईस्ट के इलाकों में जाकर चुनावी रैलियां की और डोर टू डोर प्रचार किया वह भारतीय जनता पार्टी की बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
इन राज्यों में होने हैं चुनाव
अगले कुछ महीनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में जो रणनीति नॉर्थ ईस्ट में अपनाआई उसी रणनीति के सहारे इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी वह तैयारी करने वाली है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उनकी रणनीति में ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यही है कि उनके सभी बड़े नेता चुनावों में हर छोटी बड़ी रैली कार्यक्रमों और सम्मेलनों में जाकर जनता से मुखातिब होते हैं। इस कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर देश के गृहमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाते हैं। आने वाले विधानसभा के चुनावों में एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्यों में ज्यादा से ज्यादा जनता से मुखातिब कराने की तैयारियां चल रही है। राजनीतिक विश्लेषण जटाशंकर सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनता के बीच में जाना और फिर उनसे संवाद करना निश्चित तौर पर पार्टी को फायदा तो पहुंचाता ही है।