प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दूसरे अनऔपचारिक सम्मेलन के दौरान वेशभूषा के साथ ही खाने में भी पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन छाये रहे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनपिंग को पारंपरिक तमिल सामान भेंट किए। इसमें नाचियारकोइल अन्नम लैंप और तांजवुर पेंटिंग शामिल हैं।
दो दिवसीय भारत दौरे के पहले दिन के रात्रिभोज में सांभर, और मसूर की दाल से बने लजीज दक्षिण भारतीय पकवान शामिल थे। मेन्यू में शामिल व्यंजन में सबके आकर्षण का केंद्र ‘अराचू विट्टा सांभर’ रहा। इसको और लजीज बनाने के लिए मसूर की पीसी दाल, कुछ खास मसाले और नारियल का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा इमली और टमाटर सेे तैयार ‘तक्कली रसम’ मटर से तैयार ‘कदाली कुरुमा’ के साथ ही मिष्ठान के तौर पर कवनरासी हलवा, अदा प्रधामन व मुक्कानी आइसक्रीम भी शामिल थे। उनके लिए चुनिंदा मांसाहार व्यंजन का भी प्रबंध किया गया था।
इसमें आंध्रप्रदेश का ममसम बिरयानी, मालाबार लोबस्टर, कोरी केम्पू, मट्टन उलरतियाडू, कारुवेपिल्लई मीन वारुवल, तनजावूर कोझी कड़ी, येराची घेट्टी कोझामबु आदि शामिल थे।
नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग
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पारंपरिक तमिल परिधान वेष्टि (धोती), हाफ शर्ट और कंधे पर अंगवस्त्रम रखे प्रधानमंत्री मोदी ने महाबलीपुरम में चीनी राष्ट्रपति का स्वागत किया। मोदी ने जिनपिंग को अर्जुन की तपस्यास्थली, कृष्ण बटर बॉल, पंच रथ और तट मंदिर दिखाया। इनकी ऐतिहासिकता की जानकारी दी, जिसे जिनपिंग दिलचस्पी से समझते रहे। दोनों नेताओं ने मंदिर में रामायण की कहानी का मंचन देखा। इसके बाद दक्षिण भारतीय व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
मोदी ने तीन भाषा में लिखा, वेलकम
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के भारत पहुंचने का स्वागत खास अंदाज में किया। उन्होंने इंग्लिश, मंडारिन और तमिल में ट्वीट किया, ‘भारत में आपका स्वागत है राष्ट्रपति शी जिनपिंग।’ चेन्नई पहुंचने पर मोदी ने फिर तीन भाषाओं में ट्वीट किया, ‘चेन्नई पहुंच गया। अपनी संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए मशहूर तमिलनाडु की महान भूमि पर पहुंचकर बहुत खुश हूं। यह भी बेहद खुशी की बात है कि तमिलनाडु चीन के राष्ट्रपति का स्वागत कर रहा है। उम्मीद करता हूं कि इन अनौपचारिक बैठक से भारत और चीन के संबंध और मजबूत होंगे।’
इसलिए महाबलीपुरम को चुना
मोदी और जिनपिंग के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए तमिलनाडु के शहर महाबलीपुरम को कूटनीतिक तौर पर चुना गया। इस शहर का चीन के साथ काफी पुराना नाता रहा है। 18वीं सदी में यहां के तत्कालीन पल्लव राजा और चीन के शासक के सुरक्षा समझौता हुआ था। लिहाजा इस शहर को चुनने के पीछे की वजह चीन के साथ पुराने रिश्तों को फिर से दिखाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तंजावुर की पेंटिंग और एक नचियारकोइल दीप तोहफे में दिया। पेंटिंग में देवी सरस्वती वीणा बजाते दिख रही हैं। छह फीट ऊंचे और 108 किलोग्राम वजन वाले नचियारकोइल दीप पर सोने की परत चढ़ी है। इसे आठ से ज्यादा कलाकारों ने 12 दिनों में तैयार किया है।
जयशंकर और डोभाल भी पहुंचे
विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी शुक्रवार को महाबलीपुरम पहुंचे। शुक्रवार शाम शोर मंदिर के प्रांगण में जयशंकर और डोभाल ने चीनी राष्ट्रपति से भेंट की।