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Modi 3.0: टीडीपी 'विश लिस्ट' में है यह सबसे बड़ा पद! केंद्र से ज्यादा राज्य में दांव लगाने वाले हैं नायडू

आशीष तिवारी
Updated Wed, 05 Jun 2024 03:01 PM IST

सार

एनडीए के महत्वपूर्ण घटक दल तेलुगु देशम पार्टी और जेडीयू के नेता शाम 4 बजे महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस बैठक में एनडीए अपने घटक दलों की उन तमाम उम्मीदों पर चर्चा करने वाला है, जिसके आधार पर सरकार बनाने का रोड मैप तैयार किया जाना है। सूत्रों की मानें, तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू की होने वाली है। 
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TDP - फोटो : Amar Ujala


एनडीए के महत्वपूर्ण घटक दल तेलुगु देशम पार्टी और जेडीयू के नेता शाम 4 बजे महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस बैठक में एनडीए अपने घटक दलों की उन तमाम उम्मीदों पर चर्चा करने वाला है, जिसके आधार पर सरकार बनाने का रोड मैप तैयार किया जाना है। सूत्रों की मानें, तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू की होने वाली है। 


तेलुगु देशम पार्टी के नेता और पूर्व विधायक एलएन सुब्बाराव ने अमर उजाला डॉट कॉम से हुई बातचीत में कहा कि उनके नेता चंद्रबाबू नायडू दिल्ली पहुंच रहे हैं। वह कहते हैं कि एनडीए उनका नेचुरल एलायंस है। इसलिए वह अन्य किसी घटक दलों के साथ तो जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। सुब्बाराव कहते हैं कि उनके नेता की प्राथमिकता में आर्थिक तौर पर खोखले हो चुके आंध्र प्रदेश को एक मजबूत स्थिति में खड़े करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राज्य की जनता ने उनको और उनकी पार्टी को जनादेश अपने प्रदेश को मजबूत करने के लिए भी दिया है। वह कहते हैं बीते कुछ समय में जिस तरीके से आंध्र प्रदेश आर्थिक रूप से खोखला हुआ है, उसके लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग उनकी पार्टी की ओर से प्राथमिकता में है।


हालांकि, सूत्रों की मानें तो टीडीपी में अंदरखाने चर्चाएं इसी बात की हो रही हैं कि कम से कम एनडीए की इस सरकार में 5 मंत्री और एक लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी दी जाए। अब सवाल यही उठता है कि बुधवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू अपनी इस मांग को किस तरीके से सामने रखते हैं। हालांकि तेलुगू देशम पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं की ओर से एक मांग उप प्रधानमंत्री जैसे पद को भी टीडीपी के खाते में देने की चर्चा हुई है। लेकिन पार्टी की ओर से इस बारे में ना तो कोई आधिकारिक बयान दिया गया है और न ही इस पर कोई टिप्पणी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो बुधवार शाम 4 बजे होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में चंद्रबाबू नायडू अपने राज्य की जनता के जनादेश पर पूरी विश लिस्ट एनडीए की बैठक में सामने रख सकते हैं, जिसमें पांच मंत्री और एक लोकसभा अध्यक्ष की मांग का शामिल होना बताया जा रहे है।


वहीं, राजनीतिक जानकारों की मानें तो टीडीपी की अहम भूमिका होने की स्थिति में पार्टी के भीतर एनडीए सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और हिस्सेदारी की भी मांग तो उठ ही रही है। सूत्रों के मुताबिक बुधवार को टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू के साथ उनके कुछ अन्य बड़े नेता भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। पार्टी के भीतर अंदर खाने चर्चा इस बात की हो रही है कि जब केंद्र की सरकार बनाने में टीडीपी की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो उनको महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भी सत्ता में मिलनी चाहिए। इसके लिए मंत्रिमंडल टीडीपी के सदस्यों की संख्या से लेकर अन्य महत्वपूर्ण पदों की भी चर्चाएं हो रही हैं। ऐसी दशाओं में राजनीतिक गलियारो में चर्चाएं इस बात की हो रहीं हैं कि टीडीपी की ओर से उप प्रधानमंत्री की भी बात की जा सकती है। हालांकि टीडीपी के नेताओं की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। 


आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक वी.टी श्रीधर कहते हैं कि सत्ता में बड़े पद की चाह तो स्वाभाविक है। लेकिन आंध्रप्रदश के संबंध में श्रीधर का कहना है यहां पर लंबी सियासत के लिहाज से तेलुगु देशम पार्टी को अपने एलायंस एनडीए के साथ ही रहना चाहिए। वह बताते हैं दिल्ली के सियासी गलियारों में भले तमाम तरह की बातें चल रही हों, लेकिन आंध्र प्रदेश में यही माना जा रहा है कि चंद्रबाबू नायडू एनडीए के साथ मिलकर सरकार का हिस्सा बनेंगे। 


इसके पीछे तर्क देते हुए श्रीधर कहते हैं कि आंध्र प्रदेश में अभी भी कांग्रेस के प्रति लोगों में पहले हुए राज्य के बंटवारे को लेकर नाराजगी है। इसलिए चंद्रबाबू नायडू ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिसके चलते राज्य में कोई बड़ा भविष्य का संकट उनकी पार्टी के लिए खड़ा हो। वह कहते हैं कि सियासी नजरिए से चंद्रबाबू नायडू एनडीए गठबंधनके साथ केंद्र सरकार में शमिल होकर राज्य के लिए विशेष आर्थिक पैकेज को ला सकेंगे। जिससे आंध्र प्रदेश कि सियासत में उनके पांव और मजबूत होंगे। उनका कहना है राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए इस वक्त बेहद आवश्यकता है। यह संभव तभी है जब वह केंद्र की सरकार में मजबूत हिस्सेदार बने। 

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