फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टूटा साल 2015 का रिकॉर्ड: संसद सत्र के औपचारिक समापन में देरी पर भड़की कांग्रेस, पूछा- क्या पका रही है सरकार?

Fri, 11 Sep 2026 12:09 PM IST
अमन तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने में देरी पर मोदी सरकार को घेरा है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है, इसी वजह से यह देरी की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
विज्ञापन
कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कांग्रेस ने शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र को स्थगित करने के बाद उसके औपचारिक रूप से समाप्त होने में हो रही देरी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है।

विज्ञापन


कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि मोदी सरकार ने सत्रावसान में देरी का अपना ही 2015 का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। साल 2015 के मानसून सत्र में संसद के अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का अंतर था, जबकि 2026 के मानसून सत्र में यह अंतर 29 दिनों तक पहुंच चुका है। यह अंतर लगातार बढ़ रहा है और सत्र समाप्त करने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही, जबकि आम तौर पर यह प्रक्रिया सिर्फ तीन से चार दिनों में पूरी हो जाती है।
 

अमित शाह पर दो-तिहाई बहुमत जुटाने का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास फिलहाल जरूरी संख्या नहीं है। रमेश ने आरोप लगाया कि जिन तीन पार्टियों ने 17 अप्रैल 2026 को विधेयक के खिलाफ वोट दिया था, उनमें पहले ही विभाजन कराया जा चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अन्य दलों पर दबाव, डराने-धमकाने और दूसरी तरह के प्रलोभनों के जरिए अपना रुख बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।

ये भी पढ़ें: चार्ली किर्क की पहली बरसी: यूएस में राष्ट्रपति के करीबी को श्रद्धांजलि, ट्रंप क्या बोले? 2025 में हुई थी हत्या

सरकार पर विपक्ष को परेशान करने का आरोप
रमेश ने कहा कि मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं करके सरकार शायद विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जब चाहे, किसी भी उद्देश्य के लिए संसद का सत्र बुला सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ इस उम्मीद में स्थिति को लंबा खींच रही है कि विपक्ष घबरा जाएगा।
विज्ञापन


परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग
जयराम रमेश ने यह भी सवाल उठाया कि मोदी सरकार परिसीमन को लेकर अपने प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर देश में व्यापक सहमति बनाने की जरूरत है। रमेश के मुताबिक, मार्च 2026 के मध्य से ही सभी विपक्षी दल लगातार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि भारतीय गणराज्य के मूल सिद्धांतों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार इतनी गोपनीयता क्यों बरत रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्दे के पीछे कुछ गड़बड़ करने की तैयारी में है, लेकिन वह दागी बहुमत हासिल करने में कभी कामयाब नहीं होगी।

17 अप्रैल को लोकसभा में विधेयक हुआ था खारिज
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए जरूरी परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया था, जिससे मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा था। उस समय हुए मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से 298 ने पक्ष में और 230 ने इसके विरोध में वोट डाला था। इस विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत के तहत कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी।
 

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें