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जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के आगे सरकार नहीं डालेगी हथियार

Tue, 09 May 2017 07:59 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा जम्मू-कश्मीर में शांति प्रयासों के बाबत काफी सक्रिय हैं। यशवंत सिन्हा चाहते हैं कि केन्द्र और राज्य सरकार वहां इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत को वरीयता देते हुए अपने वादे पर अमल करे, लेकिन केन्द्र सरकार किसी भी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। कश्मीर में अलगाववादियों, उग्रवादियों और पाकिस्तानी मंसूबों को करारा जवाब देने के लिए खुफिया, सुरक्षा एजेंसियां तथा केन्द्र सरकार नई रणनीति पर काम कर रही है।
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केन्द्रीय गृहमंत्रालय के प्रवक्ता केएस धतवालिया का कहना है कि कश्मीर में जो हो रहा है, वह सबको पता है। केन्द्र सरकार, राज्यसरकार के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर बनाए है। केन्द्रीय गृहमंत्रालय इसको लेकर काफी संवेदनशील है।

इस बारे में मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि घाटी में देश विरोधी ताकतें न केवल लोगों को गुमराह कर रही हैं बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठनों की मदद से सरकार को नीचा दिखाना चाहती हैं। इसी मकसद से नियंत्रण रेखा पर जवानों पर हमले के साथ-साथ बर्बर सलूक भी किया जा रहा है।
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सूत्रों का कहना है कि भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां ऐसी साजिश को विफल करने में सक्षम हैं। रहा सवाल कश्मीर समस्या के समाधान पर वार्ता करने का तो जब तक घाटी में हिंसा की स्थितियां बनी रहेंगी, वहां के अलगाववादियों के साथ सरकार किसी तरह की मुरव्वत के पक्ष में नहीं है।
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आर्थिक रीढ तोडऩे की तैयारी

केन्द्र सरकार राज्य सरकार के साथ समन्वय उपद्रवियों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने के लिए कारगर योजना बना रही है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर में आने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद, इमदाद समेत अन्य पर नजर रखी जा रही है।

सोशल मीडिया साइट्स को लेकर सुरक्षा एजेंसियां काफी चौकस हैं। सेना मुख्यालय के एक ब्रिगेडियर का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी मानव कूरियर का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहां इंटरनेट, मोबाइल फोन समेत अन्य संसाधनों पर निगरानी बढऩे के बाद अराजक तत्व लोगों से संदेश भेजकर अशांति फैला रहे हैं। घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में कट्टरता फैलाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इसकी भी काट ढूंढ रही हैं।

पश्त होंगे उपद्रवी
कश्मीर घाटी के अराजक तत्वों के दबाव में न आकर सरकार भी थकने, थकाने की रणनीति पर चल रही है। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर  सुरक्षा बलों की मुश्तैदी बढ़ाने के साथ-साथ घाटी के लिए नई रणनीति पर अमल की योजना है। सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बल सघन निगरानी अभियान को तेज कर रहे हैं। सैन्य सूत्र का मानना है कि सोशल मीडिया साइट समेत अन्य मामले में एहतियात के कदम उठाने के बाद जल्द ही वहां समस्या पर काबू पाया जा सकेगा।
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