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तीन तलाक: कानून को लेकर जल्दबाजी में नहीं केंद्र सरकार, शरियत कानून में बदलाव पर फोकस

Tue, 22 Aug 2017 09:31 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट के जरिए तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद केंद्र सरकार के हौसले बुलंद हैं। सरकार अब तीन तलाक पर कानून बनाने की जल्दबाजी में नहीं है।
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बल्कि अब सरकार और भाजपा का जोर शरियत कानून में बदलाव की मांग तेज करने पर रहेगा। तीन तलाक के मामले में कानून बनाने के सवाल पर केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि कानून बनाने की जरूरत नहीं है।

उक्त मंत्री ने अनौपचारिक चर्चा में बताया कि संविधान पीठ ने तीन तलाक को बहुमत से असंवैधानिक करार दे दिया है। इसलिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है। जबकि पीठ के फैसले से पहले मुख्य न्यायधिश जेएस खेहर ने कहा कि तीन तलाक पर सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केंद्र सरकार और संसद है। उन्हें ही इस पर कानून बनाना चाहिए।
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पढ़ेंः ट्रिपल तलाकः क्या है तलाक-ए-बिद्दत, सुप्रीम कोर्ट ने कौन से तलाक पर सुनाया फैसला?

खेहर ने सरकार को छह महीने का समय देते हुए कहा कि वे इस मामले में कानून बनाकर एक स्पष्ट दिशा निर्देश तय करें। मगर खेहर के फैसले पर सरकार की दलील है कि चूकी सर्वोच्च न्यायालय के पांच जजों की संवैधानिक पीठ के तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया है। इसलिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है। 

शरियत कानून में बदलाव की मांग पकडेगी जोर 

तीन तलाक पर भाजपा का पक्ष मजबूत पडने के बाद पार्टी रणनीतिकारों का आंकलन है कि गैर राजग दल अब अपने रूख को लेकर भ्रम में फंस गए हैं।

न्यायालय के फैसले पर गैर राजग दलों ने बेशक तीन तलाक खत्म किए जाने के कदम का समर्थन किया है। लेकिन लंबे समय तक इस मामले का समर्थन करने को लेकर वो फंसी हुई दिख रही हैं।

इसलिए भाजपा अब मुस्लिम समुदाय पर दबाव बढाने का अपना प्रयास और तेज करेगी। इसके लिए पार्टी की ओर से विभिन्न स्थानों से शरियत कानून में बदलाव की मांग तेज की जाएगी।

शरियत कानून को रूढीवादी करार देते हुए मुस्लिम बुद्धिजिवियों पर दबाव बनाने का प्रयास तेज होगा। इसकी बानगी सोशल मीडिया पर देखने को भी मिली है। न्यायालय के फैसले के बाद भगवा समर्थकों की ओर सोशल मीडिया पर एक देश एक कानून के नारे को आगे कर सामान्य नागरिक कानून की आवाज बुलंद की गई। 

लंबे समय में राजनीतिक लाभ मान रही भाजपा 

तीन तलाक पर भाजपा के रूख को सर्वोच्च न्यायालय से मुहर लगने के बाद पार्टी का मनोबल तो बढा है। उसे यह भी लग रहा है कि मुस्लिम विरोधी होने का उसपर लगने वाला आरोप अब कमजोर होगा।

बावजूद उसके न्यायालय के फैसले से पार्टी तात्कालिक वोट बैंक का लाभ नहीं मान रही है। बल्कि इस प्रयास को वह लंबे समय का निवेश मानकर चल रही है। भाजपा का आंकलन है कि 2019 में तो नहीं लेकिन देर सवेर देश का अल्पसंख्यक समुदाय उसके साथ जुडेगा।

इसलिए ही वह तीन तलाक के मुद्दे को धर्म का रंग देने से बचते हुए महिलाओं की समानता से जोड रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव का कहना है कि धीरे—धीरे ही सही हमारे सकारत्मक पहलों से मुस्लिम समुदाय का युवा वर्ग आने वाले दिनों में भाजपा के साथ जुडेगा।
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मिशन 2019 फतह के बाद मुस्लिमों का दिल जीतेगी भाजपा 

triple talaq
पार्टी के एक वरिष्ठ महामंत्री का कहना है कि 2019 तक भाजपा मुस्लिमों को साधने का प्रयास नहीं करेगी। लेकिन देश की इतनी बडी आबादी को छोडा भी नहीं जा सकता है। उक्त महामंत्री का कहना है कि 2019 में पार्टी को विजय दिलाने के बाद भाजपा मुस्लिमों को साथ जोडने का अभियान चलाएगी।

इस बीच मुस्लिम समाज के बीच बना भ्रम भी टूट जाएगा। उक्त महामंत्री का कहना है कि विरोधी दलों ने भाजपा के खिलाफ मुस्लिम समाज में भय पैदा किया हुआ है। यह तर्क भी दिया जाता था कि उनके समर्थन के बिना केंद्र में कोई सरकार नहीं बन सकती है।

लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा और यूपी के वर्तमान विधानसभा चुनाव के परिणामों ने मुस्लिमों के बीच बने भ्रम को तोड दिया है कि उनके बिना भी एतिहासिक जीत संभव है। अब पार्टी 2019 का जीत दर्ज करने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय को अपने साथ जोडने की कवायद करेगी।
 
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