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मोदी सरकार कैलेंडर 2019 में करेगी अपनी योजनाओं का उल्लेख, जीएसटी नदारद

Wed, 02 Jan 2019 11:03 AM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरकारी कैलेंडर
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नए साल के शुरुआत के साथ ही लोकसभा चुनाव की भी उलटी गिनती शुरू हो गई है। आम चुनाव बस कुछ ही महीने दूर हैं। खबरों की मानें तो केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2019 के सरकारी कैलेंडर में पिछले पांच साल में घोषित योजनाओं की घोषणा तारीखों और उपलब्धियों को चिंहित किया है। 2014 के बाद यह पहला मौका है जब भाजपा सरकार ने योजनाओं और नीतियों का उल्लेख कैलेंडर में किया है।

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किसानों के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए जनवरी महीने में 13 जनवरी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को चिंहित किया गया है। इस योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसके अंतर्गत किसानों को खरीफ पर 2%, रबी फसल पर 1.5% और तिलहन पर 5% वार्षिक ब्याज देकर फसल बीमा का लाभ ले सकते हैं। प्रीमियम के बाकी का हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों के मसलें पर ही भाजपा की हार हुई थी।

इसके अलावा 19 फरवरी को सॉइल हेल्थ कार्ड और वन रैंक, वन पेंशन के मुद्दे को 7 नवंबर को चिंहित किया गया है। इसी तरह 16 जनवरी को स्टार्ट अप इंडिया और 22 जनवरी को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का उल्लेख है। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में हरियाणा के पानीपत में की थी। सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत भी इसी दिन हुई थी। 
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लोगों तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने के लिए कैलेंडर में हर स्कीम की मुख्य बातें लिखी गई हैं।

इन योजनाओं का हुआ उल्लेख 

श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन (22 फरवरी), प्रधानमंत्री आवास योजना ( 1 मई), अटल पेंशन योजना (9 मई), प्रधानमंत्री जन औषधि योजना और डिजिटल इंडिया (1 जुलाई), जन धन योजना ( 28 अगस्त), स्वच्छ भारत अभियान (2 अक्टूबर), वन बंधु कल्याण योजना ( 28 अक्टूबर), प्रधानमंत्री आवास योजना (20 नवंबर) और भीम ऐप (30 दिसंबर) ।
 

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कैलेंडर से गायब जीएसटी

दिलचस्प बात यह है कि कैलेंडर में 1 जुलाई की तारीख पर जीएसटी का उल्लेख नहीं किया गया है। कैलेंडर में पिछली सरकार से तुलना भी की गई है। इसके अलावा हर पन्ने पर प्रधानमंत्री मोदी के विचार और उनकी तस्वीर मौजूद है। हर पन्ने पर महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के बारे में भी बताया गया है।

एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि सरकारी कैलेंडर पर प्रचार करने का चलन नया नहीं है बल्कि हर सरकार ऐसा करती रही है। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने भी 10-12 लाख ग्राम पंचायतों तक अपना सन्देश पहुंचाने के लिए इसका उपयोग किया था। 

प्रसिद्ध एड गुरु और 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसा हिट नारा देने वाले पियूष पांडेय कैलेंडर को सरकार की योजनाओं की उपलब्धि और संदेश पहुंचाने का बेहतर जरिया नहीं मानते।  उनके मुताबिक ज्यादातर लोग कैलेंडर पर पैसे खर्च नहीं करते। पैसे खर्च करने से पहले दो बार सोचते हैं। ऐसे कैलेंडर पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए ज्यादा मायने रखते हैं।
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