फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने के पक्ष में नहीं मोदी सरकार

Mon, 04 Apr 2016 09:06 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : PTI
विज्ञापन
मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को गैर अल्पसंख्यक संस्थान ठहराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली यूपीए सरकार की याचिका को वापस लेगी। 
विज्ञापन

केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सोमवार को न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ केबताया कि सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने का निर्णय लिया है और सरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामले से खुद को अलग करना चाहती है। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि दो महीने पूर्व ही यह निर्णय लिया गया था।

रोहतगी ने कहा एएमयू की स्थापना केंद्रीय कानून के तहत की गई थी। 1967 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अजीज बाशा मामले में फैसला दिया था कि एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है, न कि अल्पसंख्यक संस्थान। 1981 में संशोधन कर एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान करार दिया गया। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पीठ अजीज बाशा के फैसले को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाना अजीज बाशा के फैसले के खिलाफ है। 
अटॉर्नी जनरल ने पीठ से आवेदन और अपना जवाब दाखिल करने केलिए छह हफ्ते का वक्त मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। पीठ ने केंद्र का जवाब आने के चार हफ्ते के भीतर एएमयू को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अगली सुनवाई ग्रीष्मावकाश के बाद होगी।

पीठ ने साथ कुछ अन्य संगठन को इस मामले को दखल देने की इजाजत दे दी है। इन संगठनों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह इस मामले में अपना पक्ष रखना चाहते हैं। जिस पर अदालत ने कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाएगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें