काम आई कॉमन कॉज की पहल
लोकपाल की नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताते हुए एक गैरसरकारी संस्था कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने 7 मार्च की सुनवाई में लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। बेंच ने सरकार ने देरी का कारण पूछते हुए 15 दिनों केअंदर जवाब मांगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी महीने में इस मामले में सरकार को फटकार लगाई थी।
पीएम भी आएंगे जांच के दायरे में
लोकपाल केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को आरोपों की जांच करने का आदेश देने का अधिकार होगा। प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और सभी तरह के कर्मचारी जांच के दायरे में आएंगे।
शशिकला को सजा सुना कर चर्चा में आए थे जस्टिस घोष
जस्टिस घोष ने अपने सुप्रीम कोर्ट कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले दिए। वह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रही जयललिता की करीब शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में सजा सुना कर देश भर में चर्चा में आए। उन्होंने शशिकला समेत बाकी आरोपियों को दोषी करार देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि फैसला सुनाए जाने से पहले तक जयललिता की मौत हो चुकी थी।
जस्टिस घोष के अहम फैसले
- अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस मामले में जस्टिस रोहिंग्टन के साथ पीठ में रहते हुए निचली अदालत को भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और बाकी नेताओं पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
- जस्टिस घोष, चीफ जस्टिस एच एल दत्तू और जस्टिस कलीफुल्ला के साथ उस पीठ के भी सदस्य थे, जिसने तय किया था कि सीबीआई की ओर से दर्ज मुकदमे में दोषी ठहराए गए राजीव गांधी के दोषियों की सजा माफी का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है।
- जस्टिस राधाकृष्णन के साथ पीठ में रहते हुए उन्होंने जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ जैसी परंपराओं को पशुओं के प्रति क्रूरता मानते हुए उन पर रोक लगाई।
- अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन के फैसले को पलटते हुए वहां पहले की स्थिति को बहाल करने वाली संविधान पीठ में भी शामिल रहे। सरकारी विज्ञापनों के लिए दिशा निर्देश तय करने वाली बेंच के भी वो सदस्य थे।
‘देश के पहले लोकपाल नियुक्त करने के फैसले का स्वागत करता हूं। इसके लिए लोगों के आंदोलन की आखिरकार जीत हुई।’
- अन्ना हजारे, समाजसेवी