देश में कोरोना की दूसरी लहर का असर अब कम हो गया है। बीते कुछ दिनों से कोरोना के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सीबीएसई 12वीं की परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया और 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई। अब सवाल यह है कि आखिर कोरोना के घटते मामलों के बीच मोदी सरकार परीक्षा कराने से क्यों पीछे हट गई?
दरअसल, बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की मांग विपक्ष लगातार कर रहा था। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई थी। प्रियंका गांधी के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई थी।
माना जा रहा है कि परीक्षा रद्द करने का एक कारण यह भी हो सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर में केंद्र सरकार लगातार निशाने पर रही है। ऑक्सीजन, वैक्सीनेशन से लेकर बेड तक के मुद्दे पर विपक्ष ने केंद्र को घेरना में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसे में विपक्ष की इस मांग को लेकर केंद्र बैकफुट पर दिखा।
तीसरी लहर के आने की आशंका
वहीं, कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही का डर लोगों में साफ दिख रहा है। सच ये है कि खतरा उठाने की स्थिति नहीं है। स्कूल में अलग-अलग जगहों से आने वाले बच्चों का एक साथ आकर परीक्षा केंद्र में परीक्षा देना इस डर को बढ़ाता है क्योंकि तीसरी लहर के आने की आशंका बनी हुई है। हालांकि सरकार के इस फैसले के साथ ही 14 लाख 30 हजार से ज्यादा बच्चों के सामने से असमंजस खत्म हो गया है।
बैठक के दौरान पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। कोरोना के बीच बच्चों पर तनाव डालना ठीक नहीं है। पीएम ने कहा कि कोरोना काल के माहौल में बच्चों को तनाव देना उचित नहीं है। बच्चों की जान खतरे में नहीं डाल सकते हैं। 12वीं कक्षा के नतीजे समयबद्ध तरीके से एक अच्छी तरह से परिभाषित उद्देश्य मानदंड के तहत बनाए जाएंगे।
परिणाम तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्देश
बता दें कक्षा दसवीं बोर्ड परीक्षा का अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए सीबीएसई द्वारा विद्यालयों को पांच सदस्यीय शिक्षकों की कमेटी तैयार करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके साथ ही मूल्यांकन के आधार पर परिणाम तैयार करने का फार्मूला भी सीबीएसई द्वारा जारी किया जा चुका है।
संतुष्ट न होने पर दे सकते हैं परीक्षा
विशेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि सीबीएसई कक्षा दसवीं बोर्ड की तरह कक्षा बारहवीं के लिए भी ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया तैयार कर सकती है। अगर कोई विद्यार्थी आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर तैयार किए गए परिणाम से संतुष्ट नहीं है, तो उसे परीक्षा देने का एक अवसर दिया जा सकता है। स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा सभी विद्यार्थियों को परीक्षा देने का विकल्प दिया जा सकता है।