मोदी सरकार में सबसे चर्चित मंत्री रही स्मृति ईरानी का मंत्रालय बदले जाने के बाद से ही लगातार अटकलों का दौर शुरू हो गया है, सोशल मीडिया पर लोग जहां इसे डिमोशन बताकर चटकारे ले रहे हैं तो राजनीतिक हलकों में इसके अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
एक चर्चा ये भी है कि उन्हें कम अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी देकर यूपी के आने वाले विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है। हालांकि इसको लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा लेकिन जो परिस्थितियां बनती दिख रही हैं उसमें इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता।
उसकी बड़ी वजह ये भी है कि भाजपा यूपी में एक बड़े चेहरे के अभाव से जूझ रही है, ऐसा चेहरा जो युवा भी हो और उत्साही भी। जो जातिगत समीकरणों पर भी खरा उतरता हो और जनता पर उसकी बातों का असर भी दिखे। इन तमाम
मापदंडों पर तो फिलहाल स्मृति खरी ही उतरती दिख रही हैं, उनकी वाकपटुता की तारीफ तो खुद प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार कर चुके हैं।
उम्दा कलाकार होने के कारण लोगों को लुभाने की कला से भी वह भली भांति वाकिफ हैं। सरकार में उन्हें मोदी का विश्वासपात्र माना जाता है तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को भी उनसे कोई दिक्कत नहीं है। खास बात ये है कि कांग्रेस में जिस तरह से यूपी चुनावों में प्रियंका गांधी को आगे करने की चर्चा चल रही है उसकी काट के लिए भी भाजपा स्मृति ईरानी को मौका दे सकती है।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और उनके सिपहसलार अमित शाह की यह रणनीति क्या गुल खिलाती है यह तो वक्त के गर्भ में ही छिपा है लेकिन स्मृति ईरानी को लेकर अटकलों का दौर फिलहाल जारी है। आप भी रखिए इस पर अपनी राय।
स्मृति ईरानी को एचआरडी से कपड़ा मंत्रालय भेजे जाने की क्या हो सकती है वजह?