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मोदी कैबिनेट में इसी महीने बड़ा फेरबदल?: दो दर्जन मंत्रियों के विभाग बदलने की तैयारी, DMK भी हो सकता है शामिल

Wed, 19 Aug 2026 05:18 AM IST
राजकिशोर हिमांशु मिश्र

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी सरकार में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। करीब दो दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदले जाने के संकेत हैं। कुछ मंत्रियों का बोझ घट सकता है तो कुछ को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सहयोगी दल भी मंत्रालयों में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस फेरबदल में किन चेहरों की किस्मत बदलेगी? सरकार की नई प्राथमिकताएं क्या होंगी?
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मोदी कैबिनेट में बदलाव की आहट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी सरकार की टीम में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। संगठन में बदलाव के बाद अब सरकार में भी जिम्मेदारियों का बंटवारा नए सिरे से होने के संकेत हैं। करीब दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों का कामकाज कम किया जा सकता है, जबकि कुछ को नई और बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कुछ चेहरों की सरकार से संगठन में वापसी भी संभव है। इन बदलावों से सरकार की आने वाले समय की प्राथमिकताओं का संकेत मिल सकता है।

किन मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा है?

  • पीयूष गोयल को भाजपा ने कोषाध्यक्ष बनाया है। इसके बावजूद संकेत हैं कि वह मंत्री बने रहेंगे। वाणिज्य मंत्री के तौर पर व्यापार समझौतों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। अमेरिका के साथ बातचीत में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार फिलहाल उनकी जिम्मेदारी बदलने के पक्ष में नहीं दिख रही है।
  • दूसरी ओर धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन उनके किसी दूसरे मंत्रालय में लौटने की चर्चा है। संसद भवन में उन्हें किरेन रिजिजू के पास कमरा मिला है, जिसे किसी मंत्री को आवंटित किया जाता है।

 

हरदीप पुरी और महिलाओं को लेकर क्या बदलाव हो सकता है?

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर स्थिति साफ नहीं है। अगर उनका दोबारा नामांकन नहीं होता है तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्र की कैबिनेट में एक भी सिख मंत्री नहीं रहेगा। वहीं मंत्रिमंडल में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी के संकेत हैं। राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम चर्चा में है। दक्षिण भारत को संगठन में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलने के बाद सरकार में इसकी भरपाई की जा सकती है। अभी दक्षिण भारत से करीब दस मंत्री हैं, जिनमें तीन कैबिनेट और सात राज्य मंत्री हैं।

क्या सहयोगी दलों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?

  • सहयोगी दलों की मांग भी फेरबदल में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
  • लोजपा-रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से बड़ा मंत्रालय चाहते हैं। 
  • महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे भी एक और कैबिनेट पद की मांग कर रहे हैं। उनके पास 13 लोकसभा सांसद हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है।
  • साथ ही शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने की ताकीद भी की गई है।
  • तमिलनाडु से द्रमुक को भी केंद्र में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
  • प्रधानमंत्री मोदी खुद द्रमुक को साथ लाने की कोशिशों की कमान संभाल रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश और हिमाचल से कौन पहुंच सकता है दिल्ली?

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाने की चर्चा है। अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का नाम खास तौर पर चर्चा में है। हालांकि ब्रजेश पाठक भी विकल्प माने जा रहे हैं। दोनों में से किसी एक को दिल्ली लाने से उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने में मदद मिल सकती है। वहीं हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर दोनों बड़े चेहरे हैं। चुनावी जरूरत और सामाजिक समीकरण को देखते हुए अनुराग ठाकुर को लेकर भी फैसला अहम हो सकता है।

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