केंद्रीय कैबिनेट ने आर्थिक सुस्ती से निजात पाने और राजस्व बढ़ाने के लिए सरकारी कंपनियों में अब तक के सबसे बड़े विनिवेश को मंजूरी दे दी है। सरकार ने बुधवार को पांच ब्लू चिप कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और ऑनलैंड कार्गो मूवर कॉनकोर आदि में अपनी हिस्सेदारी कम करने का फैसला लिया।
सरकार इसके अतिरिक्त चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करेगी। हालांकि इन पर प्रबंधकीय नियंत्रण सरकार का ही रहेगा। इंडियन ऑयल में सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी 51.5 फीसदी है। इसके अलावा 25.9 फीसदी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम, ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लि. (ओआईएल) के पास है। सरकार ने 26.4 फीसदी हिस्सेदारी 33000 करोड़ रुपये में बेचने का फैसला किया है।
कैबिनेट ने 1.2 लाख टन प्याज के आयात को मंजूरी दे दी है। प्याज के बढ़ते दामों पर नियंत्रण लगाने और घरेलू बाजार में अधिक उपलब्धता को लेकर सरकार ने यह फैसला किया। गौरतलब है कि दिल्ली व अन्य शहरों में प्याज 60 रुपये किलो तक बिक रहा है। हाल ही में खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने सरकार द्वारा संचालित एमएमटी के माध्यम से एक लाख टन प्याज आयात करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही सरकार ने निजी आयात की भी सुविधा दी है और दिसंबर तक फाइटोसैनेटिक और फ्यूमिगेशन मानदंड में भी छूट दी गई है।
कैबिनेट ने वित्तीय संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनियों को राहत देते हुए उनके लिए स्पेक्ट्रम किस्त का भुगतान दो साल के टालने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा, दूरसंचार कंपनियों को 2020-21 और 2021-22 दो साल के लिए स्पेक्ट्रम किश्त भुगतान से छूट दी गई है । सूत्रों के मुताबिक, सरकार के फैसले से दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो को 42,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।