केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की तरह ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पार्टी के केंद्रीय संगठन के होने वाले बदलाव में चुनावी राज्यों को महत्व देंगे। दरअसल मंत्रिमंडल विस्तार के क्रम में हुए विचार विमर्श के दौरान ही केंद्रीय संगठन में फेरबदल पर भी लगातार विमर्श हुआ है।
इस क्रम में मंत्रिमंडल विस्तार की तरह ही संगठन विस्तार में भी चुनावी राज्यों को साधने की रणनीति बनी है। सारा ध्यान इस बात पर है कि संगठन और सरकार में बदलाव के दौरान चुनावी राज्यों को महत्व दे कर संतुलन साधा जाए।
मसलन मंत्रिमंडल विस्तार में संबंधित चुनावी राज्यों को मिले महत्व को संगठन में भी बरकरार रखा जाए। माना जा रहा है कि शाह भी मंगलवार को ही संगठन के खाली पद भरने के अलावा छोटा बदलाव कर सकते हैं।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि बीते एक महीने से जारी विचार विमर्श के दौरान चुनावी राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश पर खास चर्चा हुई है। खासतौर से मंत्रिमंडल विस्तार की तरह संगठन विस्तार में भी इन राज्यों के जातिगत समीकरण साधने की रणनीति बनी है।
गौरतलब है कि इस क्रम में शाह ने बीते दो हफ्ते के दौरान इन चुनावी राज्यों के कई नेताओं से मुलाकात करने के अलावा सोमवार को अपने निवास पर दो दर्जन नेताओं के साथ विचार विमर्श किया।
दरअसल मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन के लिए उत्तर प्रदेश से 5 नाम पहले ही तय किए जा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि अब यह संख्या बढ़ गई है। मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर प्रदेश के कम से कम तीन चेहरों को जगह मिलेगी जबकि संगठन में यह संख्या अब 4 हो सकती है।
इनमें राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ला, राजबीर सिंह, योगी आदित्यनाथ, अनुप्रिया पटेल, कृष्णा राज और महेंद्र नाथ पांडे के नामों पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक इन्हीं चेहरों में से तीन को मंत्रिमंडल में जबकि अन्य को संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व दिया जाएगा।