उत्पादन में बेहतर गुणवत्ता और लागत प्रभावशीलता के साथ भारत और उसके विरोधियों के बीच रक्षा तकनीकी के अंतर को कम करने की आवश्यकता है। यह कहना है कि रक्षा मंत्रालय के प्रमुख सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल विनोद खंडारे का। जनरल खंडारे शनिवार को आत्मनिर्भर भारत की ओर आगे की राह विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के सीएमडी और निजी रक्षा कंपनियों के सीईओ शामिल थे।
जनरल खंडारे ने आगे कहा कि रक्षा उत्पादन के लिए तीन से चार चीजें आवश्यक हैं। हमें भविष्य की तकनीक के साथ-साथ गुणवत्ता के मामले में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। ऐसे कई पहलू हैं, जिनमें पाकिस्तान की हालत बहुत खराब है। लेकिन पाकिस्तान के उत्पाद नाटो मानकों के हैं और लागत भी सही है। शिक्षा और सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सरकार के कई मंत्रालयों द्वारा आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि हमारे लिए निजी और सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। आरएंडडी हमारे लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में हमारे दो प्रतिद्वंद्वी हैं- चीन और पाकिस्तान। हम दूसरों से उम्मीद नहीं कर सकते। वे तो बढ़ते रहेंगे। हमें भी भागना होगा। हमें भी आगे निकलना होगा। इसके लिए पूरे देश को साथ मिलकर काम करना होगा। निर्माताओं को हमेशा उपयोगकर्ताओं से राय लेनी चाहिए कि उत्पाद में सुधार कैसे कर सकते हैं। कैसे उत्पाद की गुणवत्ता को सुधार सकते हैं। हालांकि अब ऐसी बातचीत शुरू हो गई है।