चलते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल दुनिया भर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित रहने से आसपास की गतिविधियों पर नजर कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं, टकराव और गिरने जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ता है। जापान समेत कई देशों में ऐसे मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
सड़क पर चलते हुए मोबाइल फोन देखना अब केवल एक खराब आदत नहीं, बल्कि वैश्विक सार्वजनिक सुरक्षा संकट के रूप में उभर रहा है। जापान, भारत, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों में मोबाइल स्क्रीन में डूबे पैदल यात्रियों से जुड़े हादसों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन उपयोग के कारण लोगों की सतर्कता और देखने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे टक्कर, गिरने और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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जापान टुडे के अनुसार हाल ही में जापान की राजधानी टोक्यो के व्यस्त इकेबुकुरो रेलवे स्टेशन पर 78 वर्षीय महिला एक ऐसे व्यक्ति की टक्कर से घायल हो गई, जो चलते समय मोबाइल फोन देख रहा था। यह घटना ऐसे समय हुई है जब जापान में अरुकी-सुमाहो (चलते हुए स्मार्टफोन का उपयोग) को लेकर वर्षों से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
2025 में हादसे के 43 मामले हुए दर्ज
टोक्यो अग्निशमन विभाग के अनुसार 2021 से 2025 के बीच मोबाइल देखते हुए पैदल चलने या साइकिल चलाने से जुड़े हादसों में 171 लोगों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। वर्ष 2025 में अकेले 43 मामले दर्ज किए गए। इनमें गिरना, सीढ़ियों या प्लेटफॉर्म से फिसलना तथा लोगों या वस्तुओं से टकराना प्रमुख कारण रहे।जापान की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी (एनपीए) के अनुसार 2025 में मोबाइल उपयोग से जुड़े 148 गंभीर या घातक सड़क हादसे भी दर्ज किए गए। इससे कई हादसे बढ़ने की शिकायतें आम हो गई हैं।
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भारत में स्थिति और गंभीर हो सकती है
भारत में मोबाइल और इंटरनेट यूजरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार देश में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या 100 करोड़ से अधिक है, जबकि करोड़ों लोग स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं।
हालांकि भारत में चलते समय मोबाइल उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं का अलग राष्ट्रीय डाटाबेस उपलब्ध नहीं है, लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों, रेलवे स्टेशनों, मेट्रो नेटवर्क और व्यस्त बाजारों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में मोबाइल देखते हुए सड़क पार करने या सीढ़ियों से गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं।