कोर्ट के आदेश के बावजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने 20 फीट से ऊंची दही हांडी लगाने का ऐलान किया है। ठाणे शहर में एमएनएस ने 20 फीट से ऊंची मानव पिरामिड बनाने पर 11 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान भी किया है। मुंबई में भी कुछ जगहों पर एमएनएस इसी तरह 20 फीट से ऊंची दही हांडी बांधने वाली है।
मुंबई पुलिस ने पहले ही एमएनएस के दही हांडी उत्सव समितियों को नोटिस जारी कर कोर्ट के आदेश का पालन करने को कहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) केपी बख्शी ने कहा कि कोर्ट का आदेश स्पष्ट है। सभी दही हांडी उत्सव समितियों को सर्कुलर भेज दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने इसका विरोध करते हुए कहा कि त्यौहार उत्सव के रूप में ही मनाया जाना चाहिए। लेकिन अब सब कोर्ट तय कर रहा है। कोर्ट को दूसरे पक्ष को भी सुनना चाहिए जो इतने साल से यह त्यौहार मानते आ रहे है। आखिरकार किन किन चीजों पर पाबंदी लगाई जाएगी।
राज ठाकरे ने कहा कि हिंदू धर्म के त्योहारों पर ही इतनी पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि मोहर्रम में भी लहू बहता है, तब कोर्ट कुछ क्यों नहीं कुछ कहती। दही हांडी के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर आपत्ति जताते हैं तो मस्जिदों में लगने वाले लाउड स्पीकर पर कोई कुछ क्यों नहीं कहता। राज ने कहा कि कोर्ट को धार्मिक त्यौहार में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति को खत्म नहीं होने देंगे। पिछले दो साल से इस त्योहार को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दही हांडी की ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा नहीं होगी और इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चे शामिल नहीं होंगे। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई थी कि दही हांडी की ऊंचाई बढ़ाई जाए और इसके लिए उन्होंने सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया है। राज्य सरकार ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा था कि अगर ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई तो खेल की चमक खत्म हो जाएगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पुराना फैसला बरकरार रखा है।