Maharashtra: शिवसेना (यूबीटी) नेता वरुण सरदेसाई ने कहा कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने से पहले मनसे को उनकी पार्टी को जानकारी देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और अलग फैसला लेने से पहले चर्चा की गुंजाइश थी। पढ़ें रिपोर्ट-
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता वरुण सरदेसाई ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ हाथ मिलाने से पहले शिवसेना (यूबीटी) को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। युवा सेना के सचिव सरदेसाई का यह बयान ऐसे समय आया, जब कुछ दिन पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की राजनीति को 'गुलामों का बाजार' बताया। उन्होंने यह टिप्पणी अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ एक मंच साझा करते हुए की थी।
विज्ञापन
वरुण सरदेसाई ने क्या कहा?
वरुण सरदेसाई ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, मनसे एक अलग पार्टी है। मैं उन्हें यह बताने की जरूरी नहीं समझता कि उन्हें क्या करना चाहिए। लेकिन कल्याण-डोंबिवली के संदर्भ में मैं यह कह रहा हूं। हमने वहां मिलकर चुनाव लड़ा था। अगर उन्हें कोई अलग फैसला लेना था, तो हमें इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। आपसी बातचीत से कोई रास्ता निकल सकता था। उन्होंने कहा कि यही उनकी एकमात्र अपेक्षा थी। सरदेसाई ने बताया कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) के 11 पार्षद हैं, जबकि मनसे के पास पांच पार्षद हैं।
मनसे के पांच पार्षदों का शिवसेना को समर्थन देने का फैसला
नगर निकायों में महापौर पद को लेकर लग रही अटकलों के बीच बुधवार को कल्याण-डोंबिवली में नया राजनीतिक समीकरण सामने आया, जब मनसे के पांच पार्षदों ने भाजपा की सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को समर्थन देने का फैसला किया। मनसे के स्थानीय नेता और पूर्व विधायक राजू पाटिल ने दावा किया कि यह फैसला राजनीतिक स्थिरता के लिए मनसे प्रमुख राज ठाकरे की अनुमति से लिया गया है।