Maharashtra Mayoral Election: महाराष्ट्र के चंद्रपुर में मेयर चुनाव के नतीजों पर राजनीति तेज है, जो राज्य में बड़ा सियासी हलचल पैदा कर रहा है। एमवीए गठबंधन दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष ने रिश्वत के आरोपों के ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस / मनसे) के मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने आरोप लगाया है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पार्षदों को भाजपा का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये दिए गए। हालांकि शिवसेना यूबीटी और भाजपा, दोनों ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
चंद्रपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और माना जा रहा था कि मेयर पद उसी को मिलेगा।
लेकिन चुनाव में अचानक समीकरण बदल गए और भाजपा ने शिवसेना यूबीटी के कुछ पार्षदों के समर्थन से मेयर पद जीत लिया।
भाजपा की संगीता खांडेकर सिर्फ एक वोट से कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को हराकर मेयर बनीं।
वहीं शिवसेना यूबीटी के प्रशांत दनाव डिप्टी मेयर चुने गए।
मनसे नेता का क्या है आरोप?
संदीप देशपांडे ने दावा किया कि हर शिवसेना यूबीटी पार्षद को ₹1 करोड़ दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को ₹50 लाख मिले। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब शिवसेना यूबीटी भाजपा का समर्थन करे तो ठीक, लेकिन मनसे करे तो गलत बताया जाता है।
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आरोपों पर शिवसेना यूबीटी और भाजपा की प्रतिक्रिया
पार्टी के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने आरोपों को झूठा बताते हुए कहा अगर संदीप देशपांडे सबूत दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। वहीं शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने भी कहा कि हार के लिए कांग्रेस की स्थानीय गुटबाजी जिम्मेदार है, न कि कोई सौदेबाजी। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि संदीप देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। ये सिर्फ मनसे और शिवसेना यूबीटी के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है।
विपक्षी गठबंधन पर असर
यह घटना विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी साथ हैं। इस पूरे घटनाक्रम से विपक्ष की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।