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मिजोरमः आईआरसी की 233वीं मध्यावधि परिषद की बैठक, सीएम लालदुहोमा बोले- रिजिड पेवमेंट टेक्नोलॉजी का हो इस्तेमाल

सार

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने राज्य में सड़क संपर्क को विकास की पहली आवश्यकता बताया और पहाड़ी इलाकों में टिकाऊ निर्माण के लिए रिजिड पेवमेंट तकनीक अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने राज्य की सीमित परिवहन सुविधाओं और कमजोर सड़क ढांचे की ओर ध्यान दिलाते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों को रणनीतिक महत्व देने की मांग की। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बुनियादी ढांचे के विकास में केंद्र की प्रतिबद्धता जताई और सीमावर्ती राज्यों को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया।
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233वीं भारतीय सड़क कांग्रेस मध्यावधि परिषद बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क संपर्क की मांग तेजी से बढ़ रही है। समुदाय अब सड़कों को विकास की पहली आवश्यकता मानते हैं। उन्होंने मिजोरम की पहाड़ी भौगोलिक स्थिति और अत्यधिक वर्षा को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में रिजिड पेवमेंट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाए, क्योंकि यह तकनीक शुरू में भले ही महंगी हो, लेकिन लंबे समय तक टिकाऊ रहती है और रखरखाव में भी सस्ती होती है। यह बात उन्होंने यहां मिजोरम विश्वविद्यालय के सभागार में भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) की 233वीं मध्यावधि परिषद बैठक के उद्घाटन के बाद कही। लालदुहोमा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
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राज्य में है एक हवाई अड्डा और एक रेल लाइन
मुख्यमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में मिजोरम में सड़क ढांचे की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में केवल एक हवाई अड्डा और एक रेलवे लाइन है, जबकि सड़क घनत्व मात्र 46.37 किमी प्रति 100 वर्ग किमी है, जो कि राष्ट्रीय औसत 116 किमी प्रति 100 वर्ग किमी से काफी कम है। यह अंतर राज्य में बुनियादी ढांचे की गंभीर कमी को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय सीमा को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव भी रखा कि राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों को रणनीतिक के रूप में माना जाए, जिससे न केवल संपर्क बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा भी सुदृढ़ हो।
 

233वीं भारतीय सड़क कांग्रेस मध्यावधि परिषद बैठक - फोटो : अमर उजाला
मिट्टी के अवशेष के अनुचित उपयोग पर जताई चिंता
उन्होंने राजमार्ग निर्माण में मिट्टी के अवशेष के अनुचित उपयोग पर चिंता व्यक्त की, जिससे पर्यावरणीय क्षति और कृषि भूमि की हानि हुई है। उन्होंने इसके लिए सख्त नियमों और सही स्थानों पर मिट्टी के निपटान की मांग की। साथ ही उन्होंने इंजीनियरों से अनावश्यक मोड़ों, समय से पहले पुनर्निर्माण और खराब जल निकासी से बचने की सलाह दी। इसके स्थान पर उन्होंने सीधी सड़क योजना, टिकाऊ निर्माण और उचित पुलिया व्यवस्था पर जोर दिया ताकि सुरक्षा, लागत और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने परिषद को मिजोरम में यह प्रतिष्ठित बैठक आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया और आशा जताई कि यह विचार-विमर्श राज्य के सड़क नेटवर्क को और बेहतर बनाने में सहायक होगा।

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बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को केंद्र प्रतिबद्धः हर्ष
इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने मिजोरम को एक सुंदर और आतिथ्यशील राज्य बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता की प्रशंसा की और क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमावर्ती राज्यों को प्राथमिकता मिलती रहेगी और रिजिड पेवमेंट के उपयोग पर राज्य के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।

इस अवसर पर पीडब्ल्यूडी मिज़ोरम के सचिव एवं स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष के. लालथामाविया ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम पीडब्ल्यूडी मंत्री वानलालह्लाना, आईआरसी के अध्यक्ष प्रो. मनोरंजन परिडा और महासचिव  राहुल गुप्ता शामिल थे। उल्लेखीय है कि भारतीय सड़क कांग्रेस, जिसकी स्थापना 1934 में हुई थी, जो देश की शीर्ष सड़क इंजीनियरिंग संस्था है। यह संस्था सड़कों, पुलों और सुरंगों के योजना, डिज़ाइन, निर्माण और रखरखाव के लिए मानक और दिशानिर्देश तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह चौथी बार है जब आईआरसी की मध्यावधि बैठक मिजोरम में आयोजित की गई है, जो इस राज्य के बढ़ते राष्ट्रीय महत्व को दर्शाती है।

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