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मिजोरम चुनाव 2018: कांग्रेस पार्टी के लिए स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में उम्मीदवार चुनना बड़ी चुनौती

Sun, 14 Oct 2018 01:37 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
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Congress
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मिजोरम विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन में समस्याओं का सामना कर रही है। पार्टी सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। राज्य की 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए 28 नवंबर को चुनाव होने हैं। 
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मुख्यमंत्री और मिजोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ललथनहवला ने गुरुवार को 36 उम्मीदवारों के नाम का एलान किया। जबकि बाकी के तीन स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चयन का जिम्मा जिला इकाइयों को सौंपा गया है। केवल लाई स्वायत्त जिला कांग्रेस कमिटी ने दो प्रत्याशियों के नाम सुझाए हैं। 

मरा स्वायत्त जिला परिषद (एमएडीसी) में कांग्रेस उम्मीदवार के चयन के मामले में तब मोड़ आ गया जब विधानसभा अध्यक्ष हईफेई कि जगह परिषद के ज्यादातर सदस्यों ने किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन किया। बता दें कि 82 वर्षीय विधानसभा अध्यक्ष हईफेई का नाम परिषद समिति के नामांकन बोर्ड ने सुझाया था। 
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प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में जिला परिषद के सदस्यों ने कहा है कि पलक विधानसभा क्षेत्र में जिला परिषद् के 11 सदस्यों से उम्मीदवार के नाम मांगे गए थे, जिनमें से 6 सदस्यों ने रिटायर्ड आईएएस के. रिआछो का समर्थन किया। जबकि केवल तीन सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष हईफेई के नाम का समर्थन किया। इसके अलावा दो सदस्यों ने अन्य दो उम्मीदवारों के नाम का प्रस्ताव दिया। 
पत्र में कहा गया कि अगर विधानसभा अध्यक्ष हईफेई अगर कांग्रेस उम्मीदवार होते है और चुनावों में हार होती है तो इस हार के लिए परिषद के सदस्य और विधानसभा के लोग जिम्मेदार नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री ललथनहवला को लिखे पत्र में कहा गया है कि प्रदेश कांग्रेस कमिटी को कुछ लोगों द्वारा चलाये गए हस्ताक्षर अभियान के आधार पर कोई फैसला नहीं करना चाहिए। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी लोगों कि भावनाओं का ख्याल रखती है इसलिए चकमा बहुल इलाके में उम्मीदवारों का चयन अभी बाकी है। 

दूसरी तरफ एनजीओ समन्वय समिति के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने सभी राजनीतिक दलों से चकमा बहुल इलाके- तुईचवांग और पश्चिम तुईपुई में चकमा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले किसी भी व्यक्ति को उम्मीदवार नहीं बनाने की अपील की है। 

प्रमुख राजनीतिक दल भी लोगों की भावनाओं का ख्याल रख चकमा समुदाय का उम्मीदवार नहीं उतारने की बात कह रहे हैं। हालांकि मुख्य प्रतिद्वंदी कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट ने ये आशंका जाहिर कि है कि अन्य राजनीतिक दल एनजीओ की अपील को दरकिनार कर दोनों सीटों पर जीत हासिल करने के लिए आखिरी समय पर चकमा समुदाय के किसी व्यक्ति का उम्मीदवार उतार सकते हैं। 
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