पड़ोसी मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में भाजपा के सहयोगी दल के तौर पर सरकार में शामिल एनपीपी ने भी इस राज्य में भगवा पार्टी के साथ गठजोड़ की संभावना खारिज कर दी है। एनपीपी अध्यक्ष कोनराड संगमा कहते हैं कि यहां हम भाजपा के खिलाफ मैदान में हैं।
अबकी ज्यादातर राजनीतिक पर्यवेक्षक किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिलने यानी विधानसभा त्रिशंकु होने की संभावना जता रहे हैं। लेकिन जोरमथांगा का कहना है कि वे ऐसी स्थिति में भी भाजपा से सहयोग नहीं लेंगे। हालांकि उनका दावा 40 में से 32 सीटें जीत बहुमत हासिल करने का है।
भाजपा अबकी पहली बार राज्य की 40 में से 39 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि उसकी हिंदुत्ववादी छवि को इस ईसाई-बहुल राज्य में संदेह की निगाहों से देखा जा रहा है। हालांकि चर्च ने अब तक भाजपा के बारे में खुल कर कोई टिप्पणी नहीं की है।