संसद के शीतकालीन सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बृहस्पतिवार को अहम बैठक हुई। बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'एक देश-एक चुनाव' विधेयक को मंजूरी दी। अब सरकार इस प्रस्ताव को सदन में पेश कर सकती है। इस प्रस्ताव पर विभिन्न सियासी दलों के नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अनिल देसाई ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई और कहा, एक देश-एक चुनाव देश के लिए अच्छा हो सकता है। लेकिन क्या चुनाव आयोग, प्रशासन और पुलिस के पास इसे लागू करने की क्षमता है? हमारे पास उचित बुनियादी ढांचा भी नहीं है। झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव भी एक साथ नहीं कराए जा सके।
वहीं, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को जेपी नड्डा और निशिकांत दुबे द्वारा उठाए गए सवालों से क्यों घबराहट हो रही है? कांग्रेस को जॉर्ज सोरोस के साथ अपने संबंध स्पष्ट करने चाहिए और यह बताना चाहिए कि उनके साथ कौन से समझौते किए हैं। इस मामले को दबाने के लिए उन्होंने एक और बेकार मुद्दा उठा दिया है।
एक देश-एक चुनाव समय की जरूरत, घट रहा मत प्रतिशत: कंगना रनौत
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि एक देश-चुनाव बहुत जरूरी है, क्योंकि हर छह महीने में चुनाव कराने से सरकार के खजाने पर दबाव पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती लोगों को बार-बार वोट देने के लिए बाहर लाना है। मत प्रतिशत हर साल घट रहा है। यह समय की जरूरत है और सभी इसे समर्थन दे रहे हैं।
समय की बचत होगी, लेकिन जीडीपी कैसे बढ़ेगी: प्रमोद तिवारी
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, हम विधेयक का मसौदा देखने के बाद ही इस पर टिप्पणी करेंगे। अगर हमें कुछ गलत लगा, तो विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा। हम समझते हैं कि इससे समय की बचत होगी। लेकिन यह कैसे जीडीपी को 1.5 फीसदी तक बढ़ाएगा, यह समझ नहीं आता।
अदाणी के मुद्दे ध्यान भटकाना चाहती है सरकार: बी.के हरिप्रसाद
कांग्रेस के बी.के. हरिप्रसाद ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, वे जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के चार चुनाव एक साथ नहीं करा पाए और अब वे 31 राज्यों की विधानसभाओं और 545 लोकसभा सीटों के चुनाव एक सात करने की बात कर रहे हैं। यह हास्यास्पद है। वे (अरबपति कारोबारी गौतम) अदाणी के भ्रष्टाचार और मणिपुर के मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं।
विधेयक के संसद में पेश होने का इंतजार करेंगे: प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी राय व्यक्त करेत हुए कहा, हम इस विधेयक के संसद में पेश होने का इंतजार करेंगे। यह कैसे लागू होगा, खर्च कितना होगा, कितने और ईवीएम लगाए जाएंगे और सभी व्यवस्थाएं कैसे की जाएंगी, यह एक लंबी प्रक्रिया है।
राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों के साथ हो चर्चा: के. सुरेश
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा, हमें नहीं पता था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक देश एक चुनाव विधेयक को मंजूरी दी है। हमें इसके बार में मीडिया से पता चला। अगर सरकार इसे पारित करना चाहती है, तो सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को साथ लेकर इस पर चर्चा करनी चाहिए। इस पर सर्वसम्मति बनानी चाहिए।
विधेयक पर होनी चाहिए खुली चर्चा: मनोज झा
वहीं, राजद सांसद मनोज झा ने कहा, इस विधेयक पर खुली चर्चा होनी चाहिए। इसे देखने के बाद ही हम समझ सकते हैं कि यह देश की प्राथमिकताओं में कहां खड़ा है। क्या इससे भी महत्वपूर्ण कुछ और मुद्दे हैं, जिन्हें सरकार पीछे धकेल रही है?
एक देश-एक चुनाव से संसाधनों की बर्बादी नहीं होगी: शंभवी चौधरी
लोजपा (रामविलास) की सांसद शंभवी चौधरी ने विधेयका का समर्थन करते हुए इसे एक अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा, यह एक बहुत अच्छा विधेयक है। मैं हमेशा एक देश एक चुनाव के पक्ष में रही हूं और लोजपा (रामविलास) ने भी इसका समर्थन किया है। जब भी चुनाव होते हैं, तो सारा फोकस चुनाव पर होता है, जिसके कारण अन्य मुद्दे, विकास और प्रशासनिक कार्य पीछे छूट जाते हैं। एक देश एक चुनाव सुनिश्चित करेगा कि संसाधनों की बर्बादी न हो और चुनाव के बाद विकास को प्राथमिकता दी जाए।
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