सरकारी सूत्र बताते रहे कि तिरंगा फहराने के दौरान हिंसा की आशंका केमद्देनजर फोर्स भेजा जा रहा है। इसी बीच सरकार ने अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को घाटी खाली करने का आदेश जारी किया। इसकी वजह आतंकी हमले की आशंकी बताई गई। आतंकी हमले की खतरे की खबर में उलझी थी कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक की तरफ से बयान आया कि राज्य में किसी भी संवैधानिक बदलाव का फैसला नहीं होने जा रहा है। लेकिन उन्होंने साथ यह भी कहा कि अगर ऐसा कुछ होने जा रहा है तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। ऐसे में पूरी तरह भ्रम की स्थिति बनी रही।
उधर कश्मीर के केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के होस्टलों के खाली कराया जा रहा था। देश के दूसरे भाग से गए मजदूरों को भी घाटी छोडने को कह दिया गया। सरकार को यह आशंका जरूर थी कि इस फैसले से कश्मीर की जनता सड़क पर उतर सकती है। रविवार देर रात राज्य की दो मुख्य राजनीतिक पार्टी पीडीपी और एनसी के महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया गया।
इंटरनेट को बंद करने और पब्लिक मीटिंग पर पाबंदी के साथ पूरी घाटी को सुरक्षा बलों से पाट दिया गया। सोमवार को इससे पहले कि लोगों में कोई प्रतिक्रिया होती अमित शाह ने योजना के तहत राज्यसभा में इस फैसले का एलान कर दिया।