लोकसभा चुनाव 2019 में बंगाल में मिली सफलता से उत्साहित भाजपा मिशन 250 की तैयारी में जुट गई है। राज्य में 2021 में विधानसभा चुनाव होने है जिसके लिए पार्टी ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा आगामी चुनाव में राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 250 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है।
लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से 18 पर जीत दर्ज की जबति सत्तारुढ़ तृणमूल के खाते में 22 लोकसभा सीटें गई। साल 2014 में हुए चुनावों में भाजपा को केवल दो सीटें ही मिली थी। लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में 40.5 प्रतिशत मत पड़े थे। फिलहाल विधानसभा में उसके छह विधायक हैं।
पार्टी चुनाव में जीत की रणनीति बनाने के अलावा तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने के इच्छुक नेताओं की छंटनी भी कर रही है। हाल में ही दार्जिलिंग नगर निगम के 30 में से 17 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। जिसके बाद इस नगर निगम पर अब भाजपा का कब्जा हो गया है। लोकसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल की है तीसरी नगर निगम है जो अब भाजपा द्वारा शासित होगी।
इससे पहले भाटपारा और नईहाटी नगर निगम पहले ही भाजपा के कब्जे में आ चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां भाजपा के निर्वाचित मेयर को नियुक्त करने के बजाय प्रशासक बैठा दिया है। राज्य सरकार ने दलील दी है कि चूंकि जल्द ही स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, इसलिए इन दोनों नगर निगमों में महापौर की नियुक्ति अनावश्यक है।
ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस के बांग्ला गौरव के धार को कुंद करने के लिए भाजपा बंगालियों के हितों के मुद्दे को खड़ा करेगी। 2021 में भाजपा का मुख्य हथियार रोजगार सृजन के लिए औद्योगिकीकरण और राज्य के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण होगा ताकि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को खदेड़ा जा सके।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ''लोकसभा चुनाव के लिए हमने 23 सीटों का लक्ष्य रखा था और 18 सीटें मिलीं। अब हमारा नया लक्ष्य (विधानसभा चुनाव में) 250 सीटों का है। हम अपनी चुनावी रणनीति बनाएंगे और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करेंगे।''