सोशल मीडिया हो, ऑनलाइन वेबसाइट हो या फिर टीवी या अखबार आपको हर जगह विभिन्न कंपनियों के आकर्षित करने वाले विज्ञापन नजर आते है। ये विज्ञापन आम आदमी के रोजमर्रा के इस्तेमाल करने वाली वस्तुओं के साथ ही कई प्रमुख वस्तुओं के होते है। इनमें कई प्रोडक्ट के विज्ञापन में कई तमाम प्रकार के दावे किए जाते है। लेकिन क्या ये दावे सच भी होते है? या फिर केवल आम ग्राहको को रिझाने के लिए ये बताए जाते है? इन्हीं सब कारणों को लेकर एएससीआई यानी भारतीय विज्ञापन मानक परिषद की नई रिपोर्ट सामने आई है। ये रिपोर्ट कहती है कि कई विज्ञापन उपभोक्ताओं की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट का कहना है कि, इन सभी में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी ऑनलाइन सट्टेबाजी और रियल एस्टेट से जुड़े विज्ञापनों में हो रही है। यही नहीं, सोशल मीडिया पर कई तरह के इन्फ्लुएंसर बिना तथ्यों को उजागर किए और सच्चाई बताए बगैर प्रोडक्ट्स का प्रचार करते हैं जो आम लोगों को गुमराह करते हैं।
एएससीआई 2024-25 में को कुल 9,599 शिकायतें सामने आई है। इनमें से 7,199 विज्ञापनों की जांच की गई, जिनमें 98 प्रतिशत में नियमों का उल्लंघन पाया गया है। इनमें सबसे ज्यादा शिकायत धोखाधड़ी व ऑनलाइन सट्टेबाजी वाले विज्ञापन की मिली है। 43 प्रतिशत शिकायते सट्टेबाजी से जुड़ी हुई थी। जबकि रियल एस्टेट सेक्टर दूसरे नंबर पर रहा है। इसके करीब 24.9 प्रतिशत विज्ञापन गुमराह करने वाले है।
इसी तरह 3,081 विज्ञापन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स से जुड़े थे। इनमें से 318 विज्ञापन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने किए थे। जबकि 233 विज्ञापन नकली दवाओं और इलाजों से जुड़े पाए गए। 21 विज्ञापन शराब ब्रांड के और 12 आरबीआई द्वारा बैन किए गए फॉरेक्स ऐप्स के थे।
इसमें से 1,015 इन्फ्लुएंसर द्वारा किए गए विज्ञापनों की जांच हुई। इसमें 98 प्रतिशत में गाइडलाइन का उल्लंघन पाया गया। जबकि 121 विज्ञापन लिंकडिन पर बिना किसी डिस्क्लोजर के पोस्ट किए गए थे। आम लोगों से मिली शिकायतों में 83.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 94.4 प्रतिशत गड़बड़ी वाले विज्ञापन डिजिटल मीडिया पर पाए गए है।