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SC: शीर्ष कोर्ट ने कहा- जज के सरकारी आवास से जुड़ी घटना पर गलत सूचना फैलाई गई; मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

Fri, 21 Mar 2025 07:19 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने 20 मार्च की कॉलेजियम बैठक से पहले जांच शुरू कर दी थी। वे आज ही भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद न्यायालय आवश्यक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा।
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सुप्रीम कोर्ट, जस्टिस वर्मा - फोटो : ANI/PTI
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़ी घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के जज से संबंधित घटना पर गलत सूचना और अफवाहें फैलाई जा रही हैं। दरअसल, जज के सरकारी आवास से कथित तौर पर आग लगने के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की जाने बात कही जा रही थी। कोर्ट के बयान में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव स्वतंत्र और आंतरिक जांच प्रक्रिया से अलग है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सूचना मिलने पर दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने साक्ष्य और सूचना एकत्र करने के लिए आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू की है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने 20 मार्च की कॉलेजियम बैठक से पहले जांच शुरू कर दी थी। वे आज ही भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद न्यायालय आवश्यक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ तथ्य स्पष्ट किए
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी घर से कथित रूप से नकदी मिलने की खबरों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुछ तथ्य स्पष्ट किए। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने उनके खिलाफ आंतरिक जांच शुरू कर दी है और उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव इससे अलग है।
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14 मार्च को सामने आया मामला, 21 मार्च को दावों से इनकार
14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने की खबर सामने आई थी। दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। इस दौरान कथित रूप से बरामद की गई राशि की मात्रा की जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि, दिल्ली अग्निशमन सेवा के प्रमुख अतुल गर्ग ने अग्निशमन कर्मियों को नकदी मिलने के दावों से इनकार किया।

कानूनी हलकों में हलचल
घटना ने कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है, जिसमें कई लोगों ने न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग की और उन्हें स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसले की आलोचना की। इन सब के बीच कथित अटकलों को विराम देते हुए शीर्ष अदालत ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, 'न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर हुई घटना के संबंध में गलत सूचना और अफवाहें फैलाई जा रही हैं।'

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शुरू की जांच
इस मामले पर चर्चा करने के लिए शीर्ष अदालत के कॉलेजियम की बैठक की रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति उपाध्याय ने साक्ष्य और सूचना एकत्र करने के लिए आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने 20 मार्च को कॉलेजियम की बैठक से पहले जांच शुरू करने की बात कही थी। बयान में कहा गया, 'रिपोर्ट की जांच की जाएगी और आगे की और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रक्रिया की जाएगी।' इसमें कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली उच्च न्यायालय में दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव स्वतंत्र और आंतरिक जांच प्रक्रिया से अलग था।

कॉलेजियम प्रस्ताव पारित करने की तैयारी में
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उनके स्थानांतरण के प्रस्ताव को 20 मार्च को सीजेआई और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों वाले सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा उठाया गया। उसके बाद शीर्ष कोर्ट के सलाहकार न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति वर्मा के अलावा संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र भेजे गए थे। कोर्ट ने कहा कि प्रतिक्रियाओं की जांच की जाएगी और उसके बाद कॉलेजियम एक प्रस्ताव पारित करेगा।

न्यायमूर्ति उपाध्याय ने जताया आश्चर्य
न्यायमूर्ति उपाध्याय ने भी अपनी पीठ की अध्यक्षता करते हुए मामले पर आश्चर्य जताया। मुख्य न्यायाधीश की प्रतिक्रिया तब आई, जब एक वरिष्ठ वकील ने उनके सामने जिक्र किया कि वह और कई अन्य अधिवक्ता इस घटना से दुखी हैं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से प्रशासनिक पक्ष पर कुछ कदम उठाने का आग्रह किया।

राज्यसभा में भी उठा मुद्दा
शुक्रवार को राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया, जिसमें अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चर्चा  के लिए एक तंत्र ढूंढेंगे। सुबह के सत्र में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने न्यायिक जवाबदेही पर अध्यक्ष की प्रतिक्रिया मांगी और उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग के बारे में लंबित नोटिस के बारे में याद दिलाया।

कानूनी विशेषज्ञों की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई
इस घटना पर कानूनी विशेषज्ञों की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई, जिन्होंने कॉलेजियम पर सवाल उठाए और न्यायमूर्ति वर्मा के इस्तीफे की मांग की। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले को बहुत गंभीर बताया और कहा कि न्यायाधीश को इस्तीफा देने के लिए कहा जाना चाहिए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को आंतरिक जांच करानी चाहिए और न्यायाधीश को अपनी बात कहने का अवसर देने के बाद सभी तथ्यों का पता लगाना चाहिए।
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कैसे होती है जांच?
संवैधानिक न्यायालयों के न्यायाधीशों के खिलाफ आरोपों से निपटने के लिए शीर्ष अदालत में एक आंतरिक जांच तंत्र है। इसके तहत मुख्य न्यायाधीश प्रारंभिक जांच करवाते हैं। फिर संबंधित न्यायाधीश की प्रतिक्रिया ली जाती है। इसके बाद जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की एक समिति गठित की जाती है। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। किसी संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीश को संसद की ओर से पारित महाभियोग प्रस्ताव के माध्यम से ही पद से हटाया जा सकता है।

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