संभावित खतरे से निबटने को तैयार थी बैकअप टीम
हवा में मौजूद खतरे को बताने वाले अर्ली वॉर्निंग जेट ने भटिंडा से, जबकि मिड एयर रिफ्यूलिंग टैंकर ने आगरा से उड़ान भरी थी। इधर, हिंडन एयरपोर्ट भी बैकअप के लिए तैयार था। सूत्रों ने बताया कि 6 मिराज एलओसी पार अंदर गए थे, जबकि 6 मिराज और कुछ सुखोई लड़ाकू विमान बैकअप के लिए नियंत्रण रेखा के पास ही उड़ान भर रहे थे। मकसद था कि कोई खतरा होने पर ये उससे निपट लेंगे और बम से लैस विमान मिशन को अंजाम देंगे।
सर्विलांस के लिए हेरॉन ड्रोन भी साथ रखे गए
मिराज एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। पाकिस्तान के रडार जाम करने का सिस्टम भी मिराज के जरिए ही इस्तेमाल किया गया। मिराज विमान 1000 किलो के लेजर-गाइडेड बम से लैस थे। इन्होंने पाक सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को टारगेट पर लिया और ग्रीन सिग्नल मिलते ही बम गिरा दिए। 12 मिराज-2000 विमानों ने किसी सीमावर्ती एयरबेस के बजाय ग्वालियर से उड़ान भरी, ताकि पाकिस्तानियों को भनक न लग सके।
जमीन में 70 फीट गड्ढा करने वाले बम गिराए
जबलपुर में बने एक हजार किलो वजनी जीबीयू-12 पेववे लेजर गाइडेड बम गिराए गए। हमले में जीबीयू-12 पेववे लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल हुआ। ये अमेरिका में बनी गाइडेंस बम किट है। इससे चुनी जगह तबाह करने में मदद मिलती है। इस तरह के मिशन में मिसाइल प्लेन के साथ जाती है। संभव है फ्रांस की माटरा मिसाइल गिराई गई हो। आतंकी ठिकाने पर 1 हजार किलो वजन वाले बम को गिराया गया है। ये बम जहां गिरते हैं, वहां 70 फीट गहरा गड्ढा बन जाता है।
बालाकोट में सबसे पुराना आतंकी ठिकाना
बालाकोट आतंकियों का गढ़ रहा है। इसे फिदायीन हमलावरों की फैक्ट्री माना जाता है। यहां 300-400 आतंकी हमेशा रहते हैं। यहां के कैंप का मुखिया यूसुफ अजहर 1999 में आईसी-814 विमान को हाइजैक कर काठमांडू से कंधार ले गया था।
मसूद अजहर का बेटा अब्दुल्ला भी यहां ट्रेनिंग कर चुका है। कुछ समय पहले ही यहां 60 आतंकियों को फिदायीन ट्रेनिंग दी गई थी। यह स्थान एबटाबाद से करीब 50 किमी दूर है, जहां 2011 में अमेरिका ने घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।