केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से अनाथ होने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए एक प्रक्रिया तय की है। दरअसल सोशल मीडिया में ऐसे बच्चों को गोद लेने के प्रस्ताव वाले संदेशों की बाढ़ आने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सार्वजनिक सूचना जारी की है।
मंत्रालय की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि वह ऐसी किसी गतिविधि में शामिल होने या उसे बढ़ावा देने से दूर रहें, जो कानूनी प्रावधानों के खिलाफ हो। मंत्रालय ने कहा है कि जिन बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को इस कोविड के कारण खो दिया है, उन्हें हर हाल में जिला बाल कल्याण समिति के सामने 24 घंटे के अंदर लाया जाए।
इसमें उनके समिति तक पहुंचने में लगने वाला समय शामिल नहीं होगा। समिति ऐसे बच्चों की तत्काल की जरूरतों का आकलन करेगी और उनके पुनर्वास के बारे में उचित आदेश पारित करेगी। बाल कल्याण मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला समिति ही करेगी कि उन बच्चों को किसी को गोद दिया जाए या उन्हें सांस्थानिक या गैर सांस्थानिक देखरेख में भेजा जाए।
मंत्रालय ने कहा कि इस बात के प्रयास किए जाएंगे कि ऐसे बच्चों को उनके परिवार या सामुदायिक माहौल में ही पलने-बढ़ने का मौका मिले। साथ ही किशोर न्याय कानून के अनुसार उनकी सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। उसने कहा कि यदि बच्चे को किसी रिश्तेदार को दिया जाता है, तो सरकार नियमित अंतराल पर उसकी सेहत की निगरानी करेगी। कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले ऐसे बच्चों की जानकारी 1098 पर दी जा सकती है।