केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय मिलकर जूट के संवर्धन के लिए काम करेंगे। बुधवार को दिल्ली में वस्त्र व महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मौजूदगी में इसके लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
नेशनल सीड्स कारपोरेशन और जूट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू के तहत किसानों को और प्रमाणिक और उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी वरन उन्नत बीजों से जूट की गुणवत्ता भी सुधरेगी जिससे उत्पादन के साथ 40 लाख जूट किसानों की बेहतरी के रास्ते खुलेंगे।
इस दौरान केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन और जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
वहीं केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने किसानों को प्रमाणित जूट बीज प्रदान करने के क्षेत्र में कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के बीच तालमेल के लिए आभार व्यक्त किया, उन्होंने कहा जो मिशन तीन साल पहले शुरू हुआ था, अब वह परवान चढ़ने लगा है।
इसके लिए इसी साल फरवरी में राष्ट्रीय तकनीकी कपड़ा मिशन में जूट और जूट टेक्स्टाइल उत्पादों के लिए एक विशेष प्रावधान किए गए थे। इस समझौते के बाद 10 हजार क्विंटल प्रमाणित बीजों की आपूर्ति के साथ साथ एनएससी वितरण चैनलों के माध्यम से किसानों को 16 हजार क्विंटल प्रमाणित बीजों की आपूर्ति होगी। इसके लिए जूट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के 100 कार्यालय बीजों की आपूर्ति किसानों तक सुलभ करेंगे।
चालीस फीसदी जूट का उत्पादन भारत में
दुनिया का चालीस से पचास फीसदी जूट का उत्पादन भारत में होता है। पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और मेघालय सरीखे सात राज्यों के लगभग 83 जिलों में जूट की फसल का उत्पादन होता है। अकेले पश्चिम बंगाल में ही 50 प्रतिशत से ज्यादा जूट का उत्पादन होता है।