अस्पताल के सभी वर्ग के कर्मचारियों को सुरक्षा देने वाले इस बिल में चिकित्सा कर्मियों को गंभीर चोट पहुंचाने वाले व्यक्ति के लिए तीन से 10 साल के कारावास की सजा और दो से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही अस्पताल या क्लीनिक की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर छह माह से 10 साल के कारावास की सजा और 50 हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। देश के चिकित्सकीय वर्ग को भी इस बिल के आने का इंतजार है।
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमेध बताते हैं कि लंबे समय से चिकित्सीय वर्ग अस्पतालों में असुरक्षित महसूस कर रहा है। संसाधनों की कमी के कारण उसे तीमारदारों का शिकार होना पड़ता है। इस बिल के लिए देश के डॉक्टर लंबे समय से एक लड़ाई लड़ते आ रहे हैं जिसे अब विराम देने की जरूरत है।
वहीं दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) आरडीए के सचिव डॉ. राजीव का कहना है कि पश्चिम बंगाल में दो डॉक्टरों से मारपीट के बाद एम्स के बैनर तले पूरे देश में विरोध बढ़ा था। सदन में बिल आने के बाद चिकित्सीय वर्ग के लिए सबसे बड़ी जीत होगी।
लंबे समय से अटका सरोगेसी कानून भी इसी शीत सत्र में पास हो सकता है। लोकसभा में पारित होने के बाद ये फिलहाल राज्यसभा में अटका हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय के भी अधिकारियों का मानना है कि इस बिल को काफी वक्त हो चुका है। अब इसके पास होने की उम्मीद है।
इसके पास होने के बाद नेशनल सरोगेसी बोर्ड गठित होगा। साथ ही जिला स्तर पर भी एक बोर्ड गठित होगा जिसमें प्रसूति रोग के अलावा बालरोग विशेषज्ञ और जिले का सिविल सर्जन भी शामिल होगा। इस बिल के पास होने के बाद भारत में कमर्शियल सरोगेसी पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
ई-सिगरेट पर भी आएगा बिल
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ई सिगरेट पर प्रतिबंध लगने के बाद अब इससे जुड़ा बिल शीत सत्र में लाया जा सकता है। ई-हुक्का, ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध इत्यादि इसमें शामिल होंगे। कानून की अवेहलना करने पर बिल में एक साल की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। बीते दिनों ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगने के बाद बाजार से पुराना स्टॉक नजदीकी थाना पुलिस में जाकर जमा कराने की अवधि भी अब समाप्त हो चुकी है।