फोटो इंडियन एक्सप्रेस से साभार. पीले रंग से हाईलाइट किए गए हिस्से अमेरिकी कानून से नकल किए गए हैं।
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हमारे देश का पर्यावरण मंत्रालय तभी चर्चा का हिस्सा बनता है जब वो किसी विवादित परियोजना को हरी झंडी दिखा देता है या फिर किसी ऐसी परियोजना को रोक देता है जो विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन इस बार पर्यावरण मंत्रालय ऐसी किसी भी वजह से चर्चा में नहीं आया है। पर्यावरण मंत्रालय इस बार अमेरिका से नकल करने की वजह से चर्चा में आया है।
अंग्रेजी अखबार The Indian Express के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय की पर्यावरण पूरक योजना यानी Environment Supplement Plan (ESP) अमेरिका से 'नकल' की गई है। पर्यावरण मंत्रालय द्वार तैयार किया गया ड्राफ्ट अमेरिका के Supplemental Environmental Projects Policy (SEP)को अमेरिका द्वारा बीते साल मार्च में अंगीकार किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार 3,850 शब्दों के ड्राफ्ट में करीब 2,900 शब्द वो सीधा अमेरिकी पॉलिसी (SEP) से उठा लिए गए हैं। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा ESP का मसौदा 10 मई को वेबसाइट पर लोगों की राय के लिए डाला था। इस 'नकल' के बाद मंत्रालय पर आरोप लग रहे हैं कि इसकी मदद से कानूनों को कमजोर किया जा रहा है।
ESP के मसौदे में कहा गया है कि यदि कोई परियोजना बिना पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन EIA अधिसूचना 2006 के तहत बिना पर्यावरण मंजूरी लिए शुरु किया जाता है तो मालिकानों को ESP लागू कर उससे हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। मौजूदा समय में जो कानून है उसके अंतर्गत बिना पर्यावरण मंजूरी लिए कोई परियोजना शुरु करना अपराध है और इसके लिए जेल की सजा हो सकती है।
इस संदर्भ जानकारों का मानना है कि सिर्फ जुर्माना या भरपाई की बात से कानून तोड़े जाएंगे। यह प्रस्ताव लोगों को कानून तोड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
इस मामले पर मसौदा जारी करने वाले संयुक्त सचिव मनोज कुमार सिंह ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि SEP का आईडिया ESP (अमेरिकी कानून) से लिया गया है। अधिकतर पश्चिमी देश इसका ही अनुसरण कर रहे हैं। हमारे ड्राफ्ट की भाषा अलग है। हमने कुछ भी कॉपी नहीं किया है।
Published By Rahul Sankrityayan