मंत्रालय ने बयान में खास स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत के नक्शे में भारतीय भूभाग प्रदर्शित किया गया है, उसमें यह भी शामिल है कि 43,000 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र 1962 से चीन के अवैध कब्जे में है। यहां तक कि भारतीय धारणा के मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) ‘फिंगर 8’ पर है, ना कि ‘फिंगर 4’ पर है। यही कारण है कि भारत ‘फिंगर 8’ तक गश्त का अधिकार होने की बात लगातार कहता रहा है, जो चीन के साथ मौजूदा सहमित में भी शामिल है।
एलएसी का सम्मान सुनिश्चित किया गया
बयान में कहा गया है, भारत ने समझौते के परिणामस्वरूप किसी भी इलाके पर दावे को नहीं छोड़ा है। इसके उलट, उसने एलएससी का सम्मान सुनिश्चित किया और एकतरफा तरीके से यथास्थिति में कोई बदलाव करने से रोका है। मंत्रालय ने यह भी कहा पैंगोंग सो के उत्तरी तट पर दोनों तरफ की चौकियां पहले से हैं और अच्छी तरह से काम कर रही हैं।
इससे पहले शुक्रवार सुबह राहुल ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि सरकार अपने पुराने रुख को भूल गई। चीन के सामने नरेंद्र मोदी ने अपना सिर झुका दिया, मत्था टेक दिया। हमारी जमीन फिंगर 4 तक है। मोदी ने फिंगर 3 से फिंगर 4 की जमीन जो हिंदुस्तान की पवित्र जमीन थी, चीन को सौंप दी है।’’
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों में बयान देकर बताया था कि चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तर एवं दक्षिण किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने का समझौता हो गया है और भारत ने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है।
इस पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने उन्हें अपने परनाना से यह पूछने की सलाह दी है कि किसने भारतीय क्षेत्र चीन को सौंपा। नकवी ने राहुल के बयान को जवानों का मनोबल तोड़ने वाला बयान बताया। राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, 'उन्हें अपने परनाना (पंडित जवाहरलाल नेहरू) से पूछना चाहिए कि चीन को भारत का क्षेत्र किसने दिया है। उन्हें जवाब मिल जाएगा... कौन देशभक्त है और कौन नहीं। जनता यह सब जानती है।'