रक्षा मंत्रालय ने बताया कि डॉर्नियर विमानों को आईसीजी के जिम्मेदारी के समुद्री क्षेत्रों पर हवाई निगरानी करने के लिए सेवा में शामिल किया जाएगा। विमान में ग्लास कॉकपिट, मैरीटाइम पेट्रोल रडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिक इंफ्रा रेड डिवाइस, मिशन मैनेजमेंट सिस्टम (एमएमएस) आदि जैसे कई उन्नत उपकरण लगाए जाएंगे। मंत्रालय ने कहा कि इन विमानों के शामिल होने से समुद्री क्षेत्रों की हवाई निगरानी क्षमता और बढ़ेगी।
मंत्रालय ने कहा, ''डोर्नियर विमानों का निर्माण एचएएल (ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिवीजन), कानपुर में स्वदेशी रूप से किया जा रहा है और यह सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप रक्षा में आत्मानिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।"