Ministry of Defence: Rajnath Singh
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रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में 2,64,706 पद (सिविलियन) रिक्त पड़े हैं। कई जगहों पर ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से पदों को भरा जा रहा है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव सी.श्रीकुमार का दावा है कि इस प्रथा से रक्षा क्षेत्र में कई तरह का जोखिम सामने आ रहा है। संवेदनशील रक्षा संस्थानों में 'आईएसआई' एजेंटों द्वारा सेंध लगने का खतरा बढ़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की थी कि एक साल के भीतर सभी सरकारी विभागों में 10 लाख युवाओं को नौकरी देंगे। युवाओं की भारी संख्या, रोजगार अधिसूचना का बेसब्री से इंतजार कर रही है। रक्षा प्रतिष्ठानों में विभिन्न ट्रेड के तहत हजारों अप्रेंटिस को प्रशिक्षित किया गया है। इस पर बड़ी धन राशि खर्च हुई है। अब उनका प्रशिक्षण व्यर्थ चला गया, क्योंकि उन्हें रक्षा उद्योग में नौकरी प्रदान नहीं की गई।
हो रहा सुरक्षा मानदंडों और नियमों का उल्लंघन
'एआईडीईएफ' के महासचिव ने 13 फरवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कार्मिक मंत्रालय के राज्य मंत्री द्वारा राज्य सभा में दो फरवरी को दिए गए एक जवाब का जिक्र किया है। सदन में बताया गया कि वर्तमान में केंद्र सरकार के 78 विभागों में 9,79,327 पद रिक्त पड़े हैं। इसमें से 2,64,706 सिविलियन पद अकेले रक्षा मंत्रालय के हैं। सभी रक्षा प्रतिष्ठानों में कुशल जनशक्ति की भारी कमी है। संवेदनशील प्रतिष्ठानों में नियमित भर्ती करने की बजाए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग का सहारा लिया जा रहा है। जिन ठेकेदारों को आउटसोर्सिंग का काम दिया जाता है, वे अयोग्य/अप्रशिक्षित व्यक्तियों को कम वेतन देकर ले आते हैं। अंततः काम की गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। ठेके पर काम कर रहे श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है।
हाल ही में एक आयुध निर्माणी के एक संवेदनशील खंड यानी शेल-4 सेक्शन में 4x4 प्लांट को ठेके पर दिया गया था। वहां पर ठेकेदार ने सभी सुरक्षा मानदंडों और नियमों का उल्लंघन किया है। इसके चलते फैक्ट्री में रात में काम करते समय एक बड़ी आग दुर्घटना हुई। प्लांट में कितना नुकसान हुआ है, यह अभी पता नहीं लग सका है। रक्षा क्षेत्र में कई जगहों पर ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाते हैं, जहां प्रशासन द्वारा संवेदनशील कार्यों के लिए लोगों को आउटसोर्स किया गया है। यह एक तरह से गुणवत्ता और सुरक्षा मानदंडों से समझौता है। ऐसे ही एक अन्य मामले में, पूर्व ठेका कर्मचारी को संवेदनशील रक्षा सूचना, आईएसआई एजेंटों को देने के लिए पकड़ा गया था।
खाली पड़े पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरा जाए
सी.श्रीकुमार ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार हर समय, आउटसोर्सिंग का सहारा नहीं ले सकती। ठेकेदारी प्रथा के कारण भ्रष्टाचार और शोषण की संभावना बनी रहती है। सरकार के स्तर पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। सभी रक्षा प्रतिष्ठानों में रिक्त पड़े पदों को नियमित रोजगार प्रक्रिया के माध्यम से भरने की आवश्यकता है। रक्षा मंत्रालय में 2,64,706 पद खाली हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। रक्षा मंत्रालय/डीडीपी/डीडीआरएंड डी के तहत सभी निदेशालयों/मुख्यालयों को खाली पड़े पदों को तुरंत भरने का निर्देश दिया जाए। भर्ती प्रक्रिया में पहले उन संविदा कर्मियों को शामिल किया जाए, जो वर्षों से वहां पर काम कर रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों को तुरंत प्रभाव से नौकरी प्रदान की जाए। शेष रिक्तियों को प्रशिक्षित ट्रेड अपरेंटिस के जरिए वरिष्ठता के आधार पर भरा जा सकता है। उसके बाद शेष रिक्तियों को भरने के लिए रोजगार अधिसूचना प्रकाशित की जा सकती है। यह कदम देश में बेरोजगारी को कम करने और राष्ट्र के विकास के लिए बहुत जरुरी है। इससे प्रशिक्षित अपरेंटिस के पास उपलब्ध कौशल का उपयोग हो सकेगा।