केंद्रीय गृह मंत्री कुछ बड़ी योजना बना रहे हैं। मंत्रियों, अधिकारियों, नीति आयोग के अफसरों और सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से लगातार हो रही बैठक इसी का संकेत कर रही है। अमित शाह जम्मू-कश्मीर से लेकर देश की आंतरिक चुनौती के प्रति काफी संजीदा हैं। गृह मंत्रालय का पदभार संभालते ही उन्होंने मोटे तौर पर आंतरिक सुरक्षा का जायजा लिया था।
इस दौरान उन्होंने अपनी पहली प्राथमिकता आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना ही बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि वह इस दिशा में कुछ बड़ा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मामले में भी केंद्रीय गृह मंत्री कोई बड़ी योजना बना रहे हैं। हालांकि वह क्या कर रहे हैं, इसका ठीक-ठीक अंदाजा उनके, एनएसए या प्रधानमंत्री के सिवा किसी के पास होने की गुंजाइश कम है, क्योंकि शाह अपने पत्ते आसानी से नहीं खोलते।
मतगणना से ठीक पहले मीडिया को दिए साक्षात्कार में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दृढ़ता से दोहराया था कि वह धारा 370 और अनुच्छेद 35ए को लेकर संवेदनशील हैं। बतौर गृह मंत्री यह मुद्दा उनके एजेंडे में शामिल होने की पूरी संभावना है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह इस दिशा में देश को एक सकारात्मक संदेश दे सकते हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर का उग्रवाद, नक्सलवाद को नियंत्रण में रखना भी केंद्र सरकार की प्राथमिकता में है।