केंद्र सरकार खरीफ फसलों पर किसानों को डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मुहैया कराने पर जल्द फैसला ले सकती है। सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक मंत्री समूह का गठन किया है, जो डेढ़ गुना एमएसपी की सिफारिशों पर निर्णय लेगा और कैबिनेट को मुहर लगाने के लिए भेजेगा।
कृषि मंत्रालय और नीति आयोग ने किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराने को लेकर तीन फॉर्मूलों पर विचार किया है। तीनों में से भावांतर पर एक राय बन रही है, जिसमें किसानों को एमएसपी से बाजार भाव कम होने की स्थिति में दोनों के बीच के अंतर की राशि किसानों को मुहैया कराई जाएगी।
मध्य प्रदेश द्वारा चलाई जा रही इस योजना को अपनाने से केंद्र पर खर्च का भार अन्य की तुलना में काफी कम है। इसे लागू करने पर सरकार को 10-13 प्रतिशत तक खर्च की बचत होगी।
पहला फॉर्मूला बाजार आश्वासन योजना (एमएपी) है, जिसमें राज्य सरकारों को मूल्य समर्थन योजना के तहत अनाज खरीदना होता है। उसमें औसत खर्च 12-15 फीसदी होता है, जबकि तीसरा फॉर्मूला निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर एमएसपी पर खरीद का है, जिसे व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।
तीनों फॉर्मूलों पर सिफारिशें तैयार
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के तीनों फॉर्मूलों पर सिफरिशें तैयार हैं। गृह मंत्री के नेतृत्व में गठित मंत्री समूह (जीओएम) को जल्द उन्हें प्रेषित किया जाएगा। सिफारिशों में तीनों फॉर्मूलों के गुण-दोष स्पष्ट किए गए हैं।
अन्य की तुलना में भावांतर दोषमुक्त और आशंका पर आधारित सवाल खड़े करता है, जबकि एमएपी और निजी क्षेत्र योजना को नहीं शामिल करने के तथ्यात्मक तर्क हैं, जो बताते हैं कि इन्हें लागू करने पर खर्च और निगरानी ज्यादा करनी होगी। अधिकारी के मुताबिक, आयोग ने अनुमानित खर्च निकाला है, जिसके मुताबिक एक फसल में डेढ़ गुना एमएसपी के लिए 75 से सवा लाख करोड़ रुपये सरकार को वहन करना होगा।
मंत्रिसमूह में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान, केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और केंद्रीय सड़क, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शामिल रहेंगे।
केंद्रीय कैबिनेट लेगा अंतिम फैसला
मंत्रिसमूह के निर्णय पर अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट लेगी। माना जा रहा है कि यह समूह इस सप्ताह के अंत या अगले सप्ताह बैठक कर सकता है। गौरतलब है कि एमएसपी को डेढ़ गुना करने की घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018-19 में की थी। इसमें एमएसपी को उपज के खर्च और मेहनताने के आधार पर डेढ़ गुना किया जाएगा।