केंद्र सरकार आज गन्ने की न्यूनतम सरकारी कीमत में 20 रुपये की बढ़ोतरी करने पर निर्णय ले सकती है।आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक प्रस्तावित है। कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, बैठक में 2018-19 पेराई सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 255 रुपये से बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल किया जा सकता है। खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में हालिया हुई भारी बढ़ोतरी के बाद ये किसानों के लिए दूसरी बड़ी राहत साबित हो सकती है।
मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने पहली अक्टूबर 2018 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन के लिए एफआरपी में 20 रुपये की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। सरकार बढ़ोतरी के इस प्रस्ताव से सहमत है और उसका मानना है कि इससे चीनी मिलों पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। बता दें कि एफआरपी वह न्यूनतम दाम होता है, जो शुगर मिल को किसान को देना ही पड़ता है। केंद्र द्वारा गन्ने का एफआरपी तय करने के बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में राज्य सरकारें राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) भी तय करेंगी, जोकि आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा होता है।
इधर लगेगा थोड़ा झटका भी
हालांकि गन्ना किसानों को थोड़ा झटका भी लगेगा, क्योंकि गन्ने में रिकवरी दर को भी वर्तमान की 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी किए जाने की संभावना है। बता दें कि एफआरपी गन्ने की बेसिक रिकवरी दर से जुड़ा होता है। बेसिक रिकवरी दर से किसान के गन्ने की 0.1 फीसदी ज्यादा रिकवरी के लिए उसे 2.68 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम भी मिलता है। ऐसे में बेसिक रिकवरी दर 10 फीसदी किए जाने पर किसानों को एफआरपी से बढ़कर मिलने वाले मूल्य में नुकसान होगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व हरियाणा में एसएपी सिस्टम होने से इसका प्रभाव ज्यादा नहीं पड़ेगा, लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु का किसान इससे बहुत ज्यादा प्रभावित होगा।
बंपर उत्पादन बढ़ा सकता है परेशानी
50.52 लाख हेक्टेयर हो चुकी है चालू खरीफ सीजन में गन्ने की बुवाई
49.72 लाख हेक्टेयर थी पेराई सत्र 2017-18 में गन्ने की बुवाई
06 वें महीने यानी जून तक खिंच गया था इस बार पेराई सत्र
321 लाख टन चीनी का हुआ था इस पेराई सत्र में उत्पादन
350 लाख टन तक चीनी उत्पादन बढ़ने का है चीनी मिल संघ इस्मा का अनुमान
19 हजार करोड़ रुपये का भुगतान चीनी मिलों ने नहीं किया है किसानों को अभी
दुग्ध किसानों को राहत दे सकती है सरकार
दुग्ध किसानों को राहत मुहैया कराने के लिए भी केंद्र सरकार बुधवार को फैसला ले सकती है। मंगलवार को सरकार ने महाराष्ट्र में दूध के दाम बढ़ाने को लेकर चल रही किसानों की 5 रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ाने व दुग्ध उत्पादों के निर्यात के संबंध में मांग को लेकर एक बैठक की। कृषि मंत्रालय के सूत्रों की माने तो केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में दुग्ध उत्पादों के निर्यात पर फैसला लिया जाएगा, जबकि बुधवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में बुधवार को दाम बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा होगी। इसमें वित्त मंत्री का प्रभार देख रहे पीयूष गोयल और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी शामिल होंगे।