व्यग्रता से जूझ रहे किशोरों को माइंड-बॉडी थेरेपी जैसे दिमागी चेतना तथा योग से मदद मिल सकती है। यह बात हाल ही में एक स्टडी में सामने आई है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि नकारात्मक भावों से दूर रहने, वर्तमान को महसूस करने तथा एकाग्रता बढ़ाने के लिए मेडिटेशन करना, आत्म निरीक्षण करना व सांसों को लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
द नर्स प्रेक्टिस जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा में छह स्टडीज में यह पाया गया कि व्यग्रता के शिकार किशोरों में सम्यक स्मृति उपचारों का सकारात्मक असर दिखाई दिया।