फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Millets Flour: भारतीय सेना ने सैनिकों के राशन में मोटे अनाज के आटे को भी शामिल किया; जानें इसके पीछे की वजह

Wed, 22 Mar 2023 02:49 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेना के मुताबिक, वर्ष 2023-24 से शुरू होने वाले सैनिकों के राशन में अनाज (चावल और गेहूं आटा) की अधिकृत पात्रता के 25% से अधिक नहीं होने वाले बाजरे के आटे की खरीद के लिए सरकारी मंजूरी मांगी गई है। 
विज्ञापन
सैन्य प्रमुख मनोज पांडे - फोटो : SOCIAL MEDIA
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मोटे अनाज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय सेना ने सैनिकों के राशन में मोटे अनाज के आटे को भी शामिल करने का फैसला किया है। यह निर्णय सुनिश्चित करेगा कि सैनिकों को आधी सदी के बाद देशी और पारंपरिक अनाज की आपूर्ति की जाए। इससे पहले गेहूं के आटे की वजह से बाजरे के आटे के इस्तेमाल को बंद कर दिया गया था। यह फैसला संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 को अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित करने के मद्देनजर लिया गया है। 
विज्ञापन


भारतीय सेना के मुताबिक, वर्ष 2023-24 से शुरू होने वाले सैनिकों के राशन में अनाज (चावल और गेहूं आटा) की अधिकृत पात्रता के 25 फीसदी से अधिक नहीं होने वाले बाजरे के आटे की खरीद के लिए सरकारी मंजूरी मांगी गई है। खरीद इस्तेमाल करने और मांग के आधार पर तय की जाएगी। मोटे अनाज के आटे की तीन लोकप्रिय किस्में यानी बाजरा, ज्वार और रागी वरीयता को ध्यान में रखते हुए सैनिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

क्या हैं मिलेट क्रॉप्स? इन्हें क्यों कहा जाता है सूपर फूड?
मोटे अनाज वाली फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू को मिलेट क्रॉप कहा जाता है। मिलेट्स को सुपर फूड कहा जाता है, क्योंकि इनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होते हैं। भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान के अनुसार, रागी यानी फिंगर मिलेट में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है। प्रति 100 ग्राम फिंगर मिलेट में 364 मिलिग्राम तक कैल्शियम होता है। रागी में आयरन की मात्रा भी गेहूं और चावल से ज्यादा होती है। 
विज्ञापन


क्या है मिलेट क्रॉप्स की खासियत?
मिलेट्स क्रॉप को कम पानी की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए गन्ने के पौधे को पकाने में 2100 मिलीमीटर पानी की ज़रूरत होती है। वहीं, बाजरा जैसी मोटे अनाज की फसल के एक पौधे को पूरे जीवनकाल में 350 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है। रागी को 350 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है तो ज्वार को 400 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है। जहां दूसरी फसलें पानी की कमी होने पर पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं, वहीं, मोटा अनाज की फसल खराब होने की स्थिति में भी पशुओं के चारे के काम आ सकती हैं।

भारत के बाजरा निर्यात संवर्धन कार्यक्रम को दुनिया के 72 देशों ने दिया है समर्थन
भारत के बाजरा निर्यात संवर्धन कार्यक्रम को दुनिया के 72 देशों ने समर्थन दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने 5 मार्च, 2021 को घोषणा की थी कि वर्ष 2023 अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (आईवाईओएम) के रूप में मनाया जाएगा। सरकार वर्तमान में भारतीय बाजरा और इसके मूल्य वर्धित उत्पादों को विश्व भर में लोकप्रिय बनाने तथा इसे एक जन आंदोलन बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयासरत है। बाजरा को बढ़ावा देने की सरकार की सुदृढ़ नीति के अनुसार, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों को भारतीय बाजरा की ब्रांडिंग व प्रचार, अंतर्राष्ट्रीय शेफों तथा डिपार्टमेंटल स्टोर्स, सुपरमार्केट्स तथा हाइपरमार्केट्स जैसे संभावित खरीदारों की पहचान करने के लिए बी2बी बैठकों और प्रत्यक्ष करारों का आयोजन किया जा रहा है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें