दूध में पानी की मिलावट पर एक दूधिये को 29 साल बाद तो दूसरे को 22 साल बाद दो साल की कैद हुई है। एसीजेएम अदालत ने दूधियों पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिला अभिहीत अधिकारी विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि कुरारा क्षेत्र के शीतलपुर गांव निवासी शिवकुमार तिवारी का 14 सितंबर 1988 को दूध का नमूना लिया था। जांच में फैट 16 प्रतिशत व फैटी सालिड्स 22 प्रतिशत कम होने पर नमूना फेल हो गया।
इसी तरह 29 सितंबर 1995 को मौदाहा बिहरका निवासी जयप्रकाश का लिया गया सपरेटा दूध का नमूना भी लैब में फेल पाया गया। जिसमें मिल्क सालिड्स नाट फैट 12 प्रतिशत कम पाया गया। इन दोनों मामलों की सुनवाई में एसीजेएम न्यायालय ने आरोपियों को दो वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बताया कि दोनों मामले वर्ष 2011 के पहले के हैं। कहा 2011 से पहले किसी भी तरह की मिलावट में सजा का प्रावधान था। वहीं अब मिलावट के अन्य मामलों में मात्र जुर्माना लगाया जाता है। बताया कि दोनों मामलों में दूध में पानी की मिलावट पाई गई। जिससे फैट कम पाया गया।
जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व महामंत्री महेश कुमार साहू कहते हैं कि मुकदमों में पैरवी न होना इसका मुख्य कारण है। मिलावटी खाद्य पदार्थो के मामलों में खाद्य विभाग समय रहते पैरवी नहीं कर पाता। इसके पीछे विभागीय इंस्पेक्टरों का स्थानांतरण होने से तारीखों में नहीं पहुंच पाना भी है। कहा कि न्यायालय से जाने वाले सम्मन पहले पुलिस विभाग में भेजे जाते हैं। इसके बाद संबंधित थाने भेजे जाते हैं। पुलिस सम्मन लेकर जाती है लेकिन संबंधित को कापी नहीं देती बल्कि तारीख बता देती है। ऐसे में ज्यादातर अनपढ़ ग्रामीण अदालत की संबंधित तारीख को भूल जाते हैं।