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Military Exercises: अरुणाचल में होगा पूर्वी प्रचंड प्रहार अभ्यास, सशस्त्र बल करेंगे संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन

Sun, 02 Nov 2025 11:11 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर

सार

Poorvi Prachand Prahar: भारतीय सशस्त्र बल अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ नामक त्रि-सेवा अभ्यास आयोजित करने जा रहे हैं। यह अभ्यास थल, वायु और नौसेना के संयुक्त युद्ध कौशल, तकनीकी दक्षता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी को परखेगा। 
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सुरक्षा बल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में इस महीने भारतीय सशस्त्र बलों का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ आयोजित किया जाएगा। इस त्रि-सेवा युद्धाभ्यास का उद्देश्य थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच संचालनिक तालमेल, तकनीकी अनुकूलन और सामरिक समन्वय को मजबूत करना है। यह अभ्यास ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में आयोजित होगा, जिससे भविष्य की परिस्थितियों के लिए भारतीय सेना की तैयारी को परखा जाएगा।
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रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत के अनुसार, ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ एक दूरदर्शी सैन्य अभ्यास है जो बहु-क्षेत्रीय एकीकरण को मान्यता देने के लिए तैयार किया गया है। इसमें थल, वायु और समुद्री मोर्चों पर एक साथ युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इस अभ्यास का मकसद भविष्य के संभावित युद्ध परिदृश्यों में संयुक्त बलों की तत्परता और सटीक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।

अभ्यास क्यों जरूरी?
अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत विशेष बलों, मानव रहित प्लेटफॉर्म्स, सटीक प्रणाली और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन सेंटरों का समन्वित उपयोग होगा। यह सभी संसाधन एक साथ यथार्थवादी उच्च-ऊंचाई वाले वातावरण में काम करेंगे। इस दौरान विभिन्न परिस्थितियों में कमांड और कंट्रोल स्ट्रक्चर की दक्षता को भी परखा जाएगा ताकि वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता को और बेहतर किया जा सके।
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नई तकनीक और प्रक्रियाएं
‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ के दौरान सेना की नई तकनीकी क्षमताओं और संशोधित प्रक्रियाओं को भी परखा जाएगा। इससे युद्धक चपलता, त्वरित प्रतिक्रिया और अनुकूलन क्षमता में सुधार होगा। इस अभ्यास के जरिये यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारतीय सेनाएं हर परिस्थिति में मिशन रेडी रहें और किसी भी आपात स्थिति में संयुक्त रूप से कार्रवाई करने में सक्षम हों।
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पिछले अभियानों से जुड़ाव
यह अभ्यास भारत की त्रि-सेवा एकीकरण प्रयासों में एक और मील का पत्थर साबित होगा। इससे पहले ‘भाला प्रहार’ (2023) और ‘पूर्वी प्रहार’ (2024) जैसे अभ्यास सफलतापूर्वक पूरे किए गए थे। ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ इन अभियानों की अगली कड़ी है, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति सशस्त्र बलों की सामूहिक प्रतिबद्धता और तत्परता को फिर से स्थापित करता है। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह अभ्यास भारत की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता का जीवंत उदाहरण बनेगा।


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