मणिपुर में सोमवार को एक बार फिर हिंसा की घटना सामने आई। इम्फाल ईस्ट और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास जंगल में लकड़ी बीनने गए लोगों पर संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी कर दी। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। हमले के बाद से तीन लोग लापता भी बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, लकड़ी बीनने गए सभी 16 लोग मैतेई समुदाय से थे।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर जताया गुस्सा
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री आवास के बाहर रख दिए। लोगों में लगातार हो रही हिंसा और जान-माल के नुकसान को लेकर गुस्सा है। उनका कहना है कि राज्य में शांति बहाल होने के दावों के बावजूद लोगों की जान सुरक्षित नहीं है।
'अब तक मौतें ही गिन रहे हैं लोग'
हमले में घायल तीन लोगों से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह भी पहुंचे। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोगों को लगातार बताया जा रहा है कि मणिपुर में शांति लौट आई है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एक मणिपुरी और मैतेई होने के नाते हम आखिर कब तक अपनों की मौतें गिनते रहेंगे? लगातार हो रही हत्याओं ने लोगों को ऐसा महसूस करा दिया है, जैसे उनका कोई सहारा ही नहीं बचा।'
बीरेन सिंह ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ऐसे लोगों को एकजुट होने की जरूरत है, जो राज्य के मूल निवासियों की सुरक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं पर केवल निंदा करना भी शर्मिंदगी भरा हो गया है। बीरेन सिंह ने सरकार से संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करने की मांग की।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा
कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह की सरकार मणिपुर में शांति और सामान्य हालात बहाल करने में नाकाम रही है। मेघचंद्र ने कहा कि बेगुनाह लोगों की लगातार हो रही मौतें राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दिखाती हैं। साथ ही, इससे यह सवाल भी उठता है कि सरकार मौजूदा संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।
'हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी'
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि राज्य में बिगड़ते हालात की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। मेघचंद्र ने कहा कि मणिपुर के लोगों को ऐसी सरकार चाहिए, जो समुदाय का भेदभाव किए बिना हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक, सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
घटना के बाद मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई। उन्होंने बेगुनाह नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए।
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मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू हुई थी। तब से अब तक इस संघर्ष में कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। वहीं, इस साल फरवरी से राज्य में कुकी और नगा समुदायों के बीच हुई झड़पों में भी करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने राज्य में शांति बहाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।