केंद्र सरकार असम के उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोरोलैंड (एनडीएफबी) के साथ सोमवार को त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करेगी। इसके तहत एनडीएफबी की अलग बोडोलैंड राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मुख्य मांग के बिना आदिवासियों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ मिलेंगे। इसी शांति समझौते के तहत 664 उग्रवादियों ने गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सोनोवाल की मौजूदगी में एनडीएफबी के चार धड़ों का शीर्ष नेतृत्व, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौता असम में रहने वाले बोडो आदिवासियों को कुछ राजनीतिक अधिकार और समुदाय के लिए कुछ आर्थिक पैकेज मुहैया कराएगा। इसमें असम की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रखी जाएगी और एनडीएफबी की अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर विचार नहीं होगा।
समझौता राज्य के विभाजन के बिना संविधान की रूपरेखा के अंदर होगा। उन्होंने कहा, गृहमंत्री शाह इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काफी उत्साहित हैं, ताकि असम में उग्रवाद पर लगाम लग सके। एनडीएफबी के चार धड़ों का नेतृत्व रंजन दाईमारी, गोविंद बासुमातरी, धिरेन बोरो और बी साओराईगवरा कर रहे हैं। साओराईगवरा ने 2015 में आईके सोंगबीजीत को हटाकर एनडीएफबी धड़े का नेतृत्व संभाला था।
इसी साल शुरू हुई शांति प्रक्रिया
असम सरकार ने केंद्र के साथ इस महीने की शुरुआत में एनडीएफबी नेताओं के साथ शांति के लिए त्रिपक्षीय समझौता किया। इसके मुताबिक, एनडीएफबी के प्रमुख साओराईगवरा समेत सभी उग्रवादी संगठनों के नेता हिंसक गतिविधियां रोकने और शांति वार्ता में शामिल होने की सहमत हुए। वार्ता में शामिल होने के लिए साओराईगवरा के साथ एनडीएफबी के कई सदस्य 11 जनवरी को म्यांमार से भारत आए थे।