साल 1999, कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाक सैनिकों पर आग बरसाना शुरू कर दिया। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।
1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलो दिमाग में ऐसा छा गया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।
भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को वायुसेना स्टेशन जोधपुर में आयोजित एक समारोह के बाद मिग -27 विमानों को हटा दिया। इस समारोह की अध्यक्षता दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल एस के घोटिया ने की। एयर मार्शल घोटिया ने कहा कि विमान हमेशा फ्रंटलाइन पर रहा और 1999 के कारगिल युद्ध में इसने अहम भूमिका निभाई थी। यह विमान पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना के जमीनी हमले के बेड़े की रीढ़ था।
मिग-27 के इस अंतिम और उन्नत बेड़े पर वायुसेना की लड़ाकू टुकड़ी को 2006 से ही गर्व रहा है। मिग-23 बीएन, मिग-23 एमएफ और प्योर मिग-27 जैसे लड़ाकू विमान पहले ही सेवा से बाहर हो चुके हैं। इन विमानों ने शांति और युद्ध दोनों के दौरान राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। बेड़े ने कारगिल युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए दुश्मन के ठिकानों पर सटीकता के साथ रॉकेट और बम से हमले किए थे।
29वीं स्कावाड्रन वायुसेना की एकमात्र इकाई है, जो उन्नत मिग-27 उड़ा रही है। मिग-27 के इस उन्नत वर्जन ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लिया। वायुसेना में अब मिग-27 की जगह मिग-21 लड़ाकू विमान ने ले ली है।
| निर्माणकर्ता देश | रूस |
| पायलट की संख्या | एक |
| उपयोगकर्ता देश | रूस, बेलारूस, भारत, यूक्रेन, कजाकिस्तान |
| रोल | जमीन पर हमला करना |
| अस्त्र शस्त्र | मिसाइल, बम, रॉकेट, कैनन |
| लंबाई | 55 फीट |
| पंखों का विस्तार | 46 फीट |