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मिग 27: कारगिल के ‘बहादुर’ का सफर खत्म, खौफ इतनी कि पाक कहता था 'चुड़ैल'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 27 Dec 2019 08:22 PM IST

सार

  • भारतीय वायुसेना से रिटायर हुआ मिग 27
  • साल 1985 में वायुसेना में हुआ था शामिल
  • चार हजार किलोग्राम तक के हथियार ले जाने में था सक्षम
  • 1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से भर सकता था उड़ान
  • कारगिल युद्ध में सक्रिय योगदान को देखते हुए नाम मिला 'बहादुर''
  • पाकिस्तान डर कर इसे 'चुड़ैल' के नाम से पुकारता था
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मिग 27 को दी गई विदाई - फोटो : PTI

साल 1999, कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाक सैनिकों पर आग बरसाना शुरू कर दिया। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।




1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलो दिमाग में ऐसा छा गया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।



जब यह विमान जमीन की सतह के करीब उड़ान भरता था तब कोई भी रडार बड़ी मुश्किल से इसकी पहचान कर पाता था। इसकी आवाज दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करती थी। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं।

समारोह के बाद वायुसेना से हटाया गया मिग -27 लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को वायुसेना स्टेशन जोधपुर में आयोजित एक समारोह के बाद मिग -27 विमानों को हटा दिया। इस समारोह की अध्यक्षता दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल एस के घोटिया ने की। एयर मार्शल घोटिया ने कहा कि विमान हमेशा फ्रंटलाइन पर रहा और 1999 के कारगिल युद्ध में इसने अहम भूमिका निभाई थी। यह विमान पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना के जमीनी हमले के बेड़े की रीढ़ था।

मिग-27 के इस अंतिम और उन्नत बेड़े पर वायुसेना की लड़ाकू टुकड़ी को 2006 से ही गर्व रहा है। मिग-23 बीएन, मिग-23 एमएफ और प्योर मिग-27 जैसे लड़ाकू विमान पहले ही सेवा से बाहर हो चुके हैं। इन विमानों ने शांति और युद्ध दोनों के दौरान राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। बेड़े ने कारगिल युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए दुश्मन के ठिकानों पर सटीकता के साथ रॉकेट और बम से हमले किए थे।

29वीं स्कावाड्रन वायुसेना की एकमात्र इकाई है, जो उन्नत मिग-27 उड़ा रही है। मिग-27 के इस उन्नत वर्जन ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लिया। वायुसेना में अब मिग-27 की जगह मिग-21 लड़ाकू विमान ने ले ली है। 

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मिग 27 को दी गई विदाई - फोटो : PTI
साल 1999, कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाक सैनिकों पर आग बरसाना शुरू कर दिया। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।



1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलो दिमाग में ऐसा छा गया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।

जब यह विमान जमीन की सतह के करीब उड़ान भरता था तब कोई भी रडार बड़ी मुश्किल से इसकी पहचान कर पाता था। इसकी आवाज दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करती थी। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं।

समारोह के बाद वायुसेना से हटाया गया मिग -27 लड़ाकू विमान

भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को वायुसेना स्टेशन जोधपुर में आयोजित एक समारोह के बाद मिग -27 विमानों को हटा दिया। इस समारोह की अध्यक्षता दक्षिण पश्चिमी एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल एस के घोटिया ने की। एयर मार्शल घोटिया ने कहा कि विमान हमेशा फ्रंटलाइन पर रहा और 1999 के कारगिल युद्ध में इसने अहम भूमिका निभाई थी। यह विमान पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना के जमीनी हमले के बेड़े की रीढ़ था।

मिग-27 के इस अंतिम और उन्नत बेड़े पर वायुसेना की लड़ाकू टुकड़ी को 2006 से ही गर्व रहा है। मिग-23 बीएन, मिग-23 एमएफ और प्योर मिग-27 जैसे लड़ाकू विमान पहले ही सेवा से बाहर हो चुके हैं। इन विमानों ने शांति और युद्ध दोनों के दौरान राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। बेड़े ने कारगिल युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए दुश्मन के ठिकानों पर सटीकता के साथ रॉकेट और बम से हमले किए थे।

29वीं स्कावाड्रन वायुसेना की एकमात्र इकाई है, जो उन्नत मिग-27 उड़ा रही है। मिग-27 के इस उन्नत वर्जन ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लिया। वायुसेना में अब मिग-27 की जगह मिग-21 लड़ाकू विमान ने ले ली है। 

इस कारण भारतीय वायुसेना ने किया रिटायर

मिग 27 - फोटो : IAF Twitter
35 साल का सफर हुआ खत्म
भारतीय वायु सेना के बेड़े में 1985 में शामिल किए गए ‘घातक’ लड़ाकू विमान मिग-27 की आखिरी स्क्वाड्रन को शुक्रवार को औपचारिक रूप से विदा कर दिया गया। जोधपुर एयरबेस पर हुए विदाई समारोह के बाद इस स्क्वाड्रन के सात विमान हमेशा के लिए भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बन गए।
 
जोधपुर एयरबेस में इस विमान की दो स्क्वाड्रन थी, जिसमें से एक को इस साल की शुरुआत में डिकमीशन कर दिया गया था। आखिरी को आज औपचारिक रूप से विदा कर दिया गया। इन विमानों को 2016 में ही विदाई देने की तैयारी थी लेकिन वायुसेना में विमानों के घटते स्क्वाड्रन को देखते हुए इसमें तीन साल विलंब हुआ।

मिग-27 को महज 35 साल में ही इसके कलपुर्जों की कमी के कारण रिटायर करना पड़ रहा है। वायुसेना सूत्रों के मुताबिक, इस विमान का निर्माण करने वाली रूसी कंपनी अब कलपुर्जे पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इसके चलते विमान में दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। इसी साल दो मिग-27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।

पिछले 10 साल में हर साल दो मिग 27 विमान दुघर्टना का शिकार हुए हैं जिनमें वायुसेना के कई जाबाज पायलट शहीद भी हुए हैं। इस विमान में आर-29 नाम का इंजन लगा हुआ था जिसे रूस ने खुद विकसित किया था।

हवा से जमीन पर सटीक निशाना लगाने में था माहिर
मिग अपने जमाने का सबसे बेहतरीन 27 लड़ाकू विमान था। यह हवा से जमीन पर निशाना लगाने में इतना माहिर था कि दुश्मन को भनक लगने से पहले यह उसे नेस्तनाबूत कर देता था। यह फाइटर जेट 1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की उड़ान भरने में सक्षम था। इसके अलावा यह चार हजार किलोग्राम के वॉरहेड को ले जा सकता था।

ऐसे हुआ भारतीय वायुसेना में शामिल

MIG 27 - फोटो : PTI
साल 1981 में भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन से निपटने के लिए विशेष किस्म के तेज लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। उस समय पश्चिमी देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन पाकिस्तान के करीबी थे और वे भारत को अपने उन्नत लड़ाकू विमान नहीं देने वाले थे। उस समय रूस ने अपने मिग 27 विमानों को भारत को बेचने की पेशकश की।

रूस ने यहां तक कहा कि वे इस विमान को बनाने का लाइसेंस भी भारत को देगा। जिसके बाद 1985 में औपचारिक रूप से यह विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। रूस से लाइसेंस मिलने के बाद हिंदुस्तान एयरोटॉनिक्स लिमिटेड ने मिग 27 विमानों के 165 यूनिट का निर्माण किया। इसके अलावा एचएएल ने 86 विमानों को अपग्रेड भी किया। 

मिग 27 की विशेषताएं

MIG 27 - फोटो : PTI
निर्माणकर्ता देश रूस
पायलट की संख्या एक
उपयोगकर्ता देश रूस, बेलारूस, भारत, यूक्रेन, कजाकिस्तान
रोल जमीन पर हमला करना
अस्त्र शस्त्र मिसाइल, बम, रॉकेट, कैनन
लंबाई 55 फीट
पंखों का विस्तार 46 फीट 

सुखोई-तेजस ले सकते हैं जगह

MIG 27 - फोटो : PTI
भारतीय वायुसेना के घटते स्कवाड्रन की संख्या को देखते हुए जल्द ही मिग 27 की जगह सुखोई 30 एमकेआई और एलसीए तेजस मार्क वन को तैनात किया जा सकता है। बता दें कि वायुसेना को 42 से ज्यादा स्क्वाड्रन की जरूरत है लेकिन वर्तमान में केवल 30 स्कवाड्रन की कार्यरत हैं। मिग 21 बाइसन को भी जल्द ही रिटायर किए जाने की उम्मीद है। इससे वायुसेना के स्कवाड्रन की संख्या और कम होगी। 

राफेल आने में लगेगा समय
भारतीय वायुसेना ने फ्रांस की दसाल्ट एविएशन के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता किया है। हालांकि इन्हें पूर्ण रूप से भारत आने में तीन साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। इसलिए अपनी जरूरतों के देखते हुए वायुसेना एमएमआरसीए 2.0 डील को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।

क्या है एमएमआरसीए 2.0 डील

MIG 27 - फोटो : PTI
एमएमआरसीए का मतलब मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। केंद्र सरकार भारतीय वायुसेना के घटते स्कवाड्रन की संख्या को देखते हुए 20 अरब डॉलर (1.4 लाख करोड़ रुपये) के 114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रही है। यह दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। सरकार द्वारा पांच साल पहले वायु सेना के लिए 126 मध्यम बहु भूमिका लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) की खरीद प्रक्रिया को रद्द करने के बाद लड़ाकू विमानों के लिए यह पहला बड़ा सौदा होगा।
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