भारत की भी कुछ जटिल चिंताएं हैं। अमेरिका के साथ सामरिक साझेदारी वाला देश भारत, लोगों से लोगों के रिश्ते, व्यापार, आपसी हित के उपाय, सूचनाओं की सुरक्षा समेत अन्य मुद्दों पर काफी संवेदनशील है। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार घाटा, प्रमुखता सूची से अमेरिका के हटाने जैसे कदम भी अहम हैं। इसके अलावा रूस के साथ एस-400 ट्रायम्फ प्रतिरोधी मिसाइल प्रणाली का सौदा और ईरान पर प्रतिबंध लगते जाने से पैदा हो रही चिंताएं भी प्रमुख हैं। मसलन् नई दिल्ली ने ईरान के साथ समझौता करके चाबहार बंदरगाह विकसित करने का कदम उठाया है। तमाम भारतीय और अन्य कंपनियों ने निवेश किया है। ईरान से भारत बड़े पैमाने पर ईंधन तेल का निर्यात करता है। इसके बरक्स अमेरिका के प्रतिबंध भारतीय अर्थ व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय वार्ता में इन जटिल मुद्दों पर भी चर्चा के आसार हैं।
क्या है विदेश मंत्री पोंपियो का भारत आने का एजेंडा
अमेरिकी विदेश मंत्री के भारत अटकलें पहले से थी। उन्होंने यहां आने के लिए जी-20 से ठीक दो दिन पहले के समय को चुना है। पोंपियो का नई दिल्ली के बाद दक्षिण कोरिया और जापान जाने का कार्यक्रम है। जापान के ओसाका शहर में जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन संभावित है। इस तरह से भारत में नई सरकार के गठन के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री का पहला दौरा है। वह अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री बने सुब्रामण्यम एस जयशंकर से भी मिलेंगे। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि पहले से माइक पोंपियो के साथ वार्ता का कोई एजेंडा तय नहीं है, लेकिन मुद्दे तमाम हैं। वस्तुत: माइक पोंपियो विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा तय करने आ रहे हैं। इसमें भारत और अमेरिका के द्पिक्षीय, क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय हित शामिल हैं।