फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MIG 21: कल आखिरी उड़ान भरेगा मिग 21; पूर्व पायलटों ने साझा की यादें, कहा- लड़ाकू विमान ने बढ़ाई सेना की ताकत

Thu, 25 Sep 2025 11:16 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस ने कहा कि मिग-21 ने हमें सिखाया कि कैसे नवोन्मेषी बनें और परिणाम प्राप्त करें। मिग 21 के डीकमीशनिंग समारोह से एक दिन पहले भारतीय वायुसेना की ओर एक्स पर साझा किए गए एक रिकॉर्डेड वीडियो पॉडकास्ट में उन्होंने कुछ चुनौतियों को याद किया।
विज्ञापन
मिग-21 विमान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छह दशक तक देश की हवाई सीमा की सुरक्षा करने वाला देश का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 शुक्रवार को आखिरी उड़ान भरेगा। इसके बाद यह लड़ाकू विमान वायुसेना से विदा हो जाएगा। मिग-21 की विदाई पर खुद वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कॉकपिट में बैठेंगे। देश के सबसे पहले विमान मिग-21 की आखिरी उड़ान से पहले पूर्व पायलटों ने अपनी यादें साझा कीं। पायलटों ने कहा कि लड़ाकू विमान ने सेना की ताकत बढ़ाई। 
विज्ञापन


पूर्व भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एवाई टिपनिस ने कहा कि मिग-21 ने हमें सिखाया कि कैसे नवोन्मेषी बनें और परिणाम प्राप्त करें। मिग 21 के डीकमीशनिंग समारोह से एक दिन पहले भारतीय वायुसेना की ओर एक्स पर साझा किए गए एक रिकॉर्डेड वीडियो पॉडकास्ट में उन्होंने कुछ चुनौतियों को याद किया। 

टिपनिस ने जुलाई 1977 में मिग-21 बिस विमान से लैस नंबर 23 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर का पदभार संभाला था। उन्होंने कहा कि जब मिग-21 हमारे पास आया, तो सबसे पहले टाइप-74 आया। उस समय कोई ट्रेनर नहीं था। पहला सोलो मिग-21 पर ही था। मुश्किल यह थी कि न केवल कोई ट्रेनर था, न ही कोई सिम्युलेटर, बल्कि पूरे कॉकपिट में अंग्रेजी में कुछ भी नहीं लिखा था, सब कुछ रूसी भाषा में था।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि उनके लिए गति मापन इकाई भी अचानक नॉट से किमी/घंटा में बदल गई। यह भी एक चुनौती थी क्योंकि पायलट नॉट के आदी थे। पहले एकल में आप अधिकतर खोए हुए रहते हैं, जब तक कि आप वापस नहीं आते और आपको यह नहीं पता होता कि इसे कैसे प्रबंधित किया जाए।

पूर्व शीर्ष भारतीय वायुसेना प्रमुख ने बताया कि मिग-21 में हम सभी स्पेससूट में उड़ान भर रहे थे। चाहे आप विश्वास करें या नहीं। हम अपनी गर्दन को एक तरफ से दूसरी तरफ बड़ी मुश्किल से हिला पाते थे।

पॉडकास्ट में रिटायर्ड एयर कमोडोर नितिन साठे ने कहा कि छह दशकों से अधिक समय से मिग-21 भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहा है। यह युद्ध और शांति में एक प्रतीक, एक विश्वसनीय साथी और लड़ाकू पायलटों की पीढ़ियों के लिए एक परीक्षण स्थल रहा है। मिग-21 ने भारतीय वायुसेना को ऐसे पंख दिए, जो पहले कभी नहीं मिले थे।

स्क्वाड्रन संख्या 23 के कमांडिंग ऑफिसर, ग्रुप कैप्टन नंदा राजेंद्र ने कहा कि 1965 और 1971 के युद्ध में सबसे उन्नत लड़ाकू विमान होने के साथ-साथ यह भारत की सभी सैन्य कार्रवाइयों में अग्रणी रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह एक विरासत लड़ाकू विमान था। हालांकि इसे ओआरपी (ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म) कर्तव्यों के लिए नियुक्त किया गया था और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम आसमान की रक्षा के लिए तैयार थे।

एक पूर्व भारतीय वायुसेना पायलट ने कहा कि दुर्घटनाओं से जुड़े किसी भी विमान के लिए लोगों के एक वर्ग द्वारा उड़ता ताबूत जैसे वाक्यांशों का प्रयोग उचित नहीं है। यदि ऐसे शब्दों का प्रयोग उस विमान के लिए किया जाता है जिसे पायलट उड़ा रहे हैं, तो इससे उनके परिवार के सदस्यों के मनोबल पर भी असर पड़ता है। मिग-21 ने 1965 और 1971 के युद्धों और 1999 के कारगिल संघर्ष के साथ-साथ 2019 के बालाकोट हमले में भी भाग लिया था। चंडीगढ़ में होने वाले डीकमीशनिंग समारोह में टिपनिस के अलावा एस कृष्णास्वामी, एसपी त्यागी, पीवी नाइक, बीएस धनोआ और आरकेएस भदौरिया भी शामिल होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें